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Friday, December 24, 2021

संवेदना : चित्र आधारित कविता

               


क्या सम और विषमता क्या

परिस्थितियां अपनी एक सी हैं।

जन्म दिवस कुछ याद नही

स्थितियाँ अपनी एक सी हैं।


कूडे के ढेर मे मिला हमे

खुशियों का एक बहाना जब 

यूं लगा कि जैसे पूर्व जन्म की

त्रुटियां अपनी एक सी हैं।


शुभ हो ये जन्म-दिवस हमको

तुम मुझे कहो मैं तुम्हे कहूँ

क्या फर्क हमे सच हो या गलत

विसंगतियां अपनी एक सी हैं।


दुनिया से क्या हमें गिला

अपनी किस्मत का हमे मिला

लगता है शायद काल चक्र की

गतियां अपनी एक सी हैं।

स्थितियाँ अपनी एक सी हैं।

Saturday, December 11, 2021

मेरे शब्दों की यात्रा


कुछ शब्द अधूरे लिये हुए
खुद को ना तुम भरमाओ।
मेरे शब्दों की यात्रा मे
तुम भी शामिल हो जाओ।

शब्द मेरे बस शब्द नही 
प्रतिबिंब हैं मेरे मन का
शब्दों से जो भी अर्थ मिले 
वो सार मेरे जीवन का।
जिस राह पे मेरे शब्द चलें
तुम फूलों सा खिल जाओ।
मेरे शब्दों की यात्रा मे 
तुम भी शामिल हो जाओ।

शब्दों मे ही है धुँध भरा 
शब्दों मे भरा उजाला है।
शब्दों से ही है प्रेम घृणा 
शब्दों का खेल निराला है।
जिन शब्दों मे हैं धुँध भरे
तुम उसमे ना खो जाओ।
मेरे शब्दों की यात्रा मे 
तुम भी शामिल हो जाओ।

Saturday, November 6, 2021

जीवन एक प्रेम की धारा

         


नदी हमारी नाव हमारा। 

जीवन एक प्रेम की धारा।

नियति नही फिर भी तो वो 

बहता सबके अनुकूल।

बेमौसम ही  खिल जाते हों 

ज्यों गुलाब के फूल।


धारा को है बहते रहना।

बाधाओं के पार उतरना।

स्थितियाँ मौसम की हों

कितनी भी प्रतिकूल।

बेमौसम ही खिल जाते हों

ज्यों गुलाब के फूल।


हँसते और हँसाते रहना।

प्रेम का पाठ पढाते रहना।

राह मे इसके मिल जाएं 

चाहे काँटे या शूल।

बेमौसम ही खिल जाते हों।

ज्यों गुलाब के फूल।

Friday, November 5, 2021

शब्दों की मर्यादा

          


शब्द तो आतुर रहते हैं

जस का तस कह देने को

पर मैने उन्हे मर्यादाओं का

बोध करा के रखा है।


क्या लिखना है उंगलियों को

जिह्वा को क्या बोलना है।

सब कुछ निर्भर है शब्दों पर

निर्भर हैं शब्द अन्तर्मन पर

इन सबके बीच मैने थोड़ा 

अवरोध बना के रखा है।

और मैने उन्हे मर्यादाओं का

बोध करा के रखा है।


बेवजह ना ऊंची हो पाये 

आवाज पे एक नियन्त्रण हो।

जो कष्ट किसी को देते हों

हर बात पे एक नियन्त्रण हो।

इसलिये राह मे इनके एक

गतिरोध बना के रखा है।

और मैने उन्हे मर्यादाओं का

बोध करा के रखा है।

Saturday, October 23, 2021

जीवन सागर पार

                        


जीवन सागर पार किनारा 

किसने देखा है।

पार समन्दर नाव हमारा 

किसने देखा है।


जीवन के इस पार तो इंसाँ 

खुद को समझ नही पाया

क्या होगा उस पार हमारा 

किसने देखा है।


मानव जन्म मिला है तो फिर 

मानव धर्म निभाना है

कौन जन्म फिर मिले दुबारा 

किसने देखा है।


जीवन पथ के दुविधाओं मे 

जब भी मन ये व्यथित हुआ

अन्तर्मन का दिया इशारा 

किसने देखा है।


वो गरीब जो महापुरुषों के 

प्रवचनो का नायक था 

कैसे कैसे किया गुजारा 

किसने देखा है।

Friday, October 15, 2021

किसको राम कहें।

                  


कृत्रिम रावण जल जायेगा।

पर फिर जिन्दा हो जायेगा।

अगले वर्ष जलने के लिये 

फिर अपना रूप दिखायेगा।

युगों युगों तक यही  क्रिया

ऐसे ही दोहरायी जायेगी।

पर दुनिया जीवित रावण 

किंचित भी मार ना पायेगी।

जब इसका कोई अन्त नही

कैसे अन्तिम संग्राम कहें।

रावण तो हैं अनगिनत यहां

पर किसको राम कहें।

पर किसको राम कहें।

Thursday, October 14, 2021

एक पुष्प तुम्हारे नाम करूं।

 


तुम आओ तुम्हारा अभिनन्दन

तुम्हे एक समर्पित शाम करूं।

पुष्पों से भरे गुल्दस्ते से 

एक पुष्प तुम्हारे नाम करूं।


हृदय के किसी अन्त: तल पर

यादों का एक पुलिंदा है।

कुछ तो उसमे मृतप्राय पड़े 

पर कुछ तो अभी तक जिन्दा है।

निर्जीव पड़े  स्मृतियों  मे 

तुम आओ तो उनमे प्राण भरूं।

पुष्पों से भरे गुल्दस्ते से 

एक पुष्प तुम्हारे नाम करूं।


यादों का एक स्वभाव यही 

बस अनायास आते रहना।

कोई चाहे या फिर ना चाहे

स्मृतियों मे छाते रहना।

आते जाते स्मृतियों का 

तुम आओ तो अल्प-विराम करूं।

पुष्पों से भरे गुलदस्ते से

एक पुष्प तुम्हारे नाम करूं।

Sunday, October 10, 2021

नाम-बेनाम

                    


दौर-ए-जमाँ  मे ये भी मुकाम शामिल है।

इंसानियत की कत्ल मे इन्सान शामिल है।


किसको सजा मिलेगी गुनाहगार कौन है

फैसले मे मुंसिफ का भी ईमान शामिल है।


फ़ेहरिस्त झूठों की अखबारों मे नही छपती

सबको पता है उसमे तुम्हारा नाम शामिल है।


सोचो की तुम पर इतने इल्जाम क्यों लगे

इसमे तुम्हारा खुद का भी बयान शामिल है। 


महफिल मे एक शख्स पर सबकी निगाह है

नामवरों मे शायद कोई बेनाम शामिल है।

Sunday, September 19, 2021

जीना भी एक इल्म है।

ऐसा नही कि खुश नही हैं जिन्दगी से हम।

शिकवा भी कर रहे हैं बड़ी सादगी से हम।


मिलते नही हो तुम ना गुजरते करीब से

उकता गये हैं अब तो तेरी बन्दगी से हम।


बुझने न दें चरागों को नकली हवाओं से 

भर दें चलो अंधेरों को सब रोशनी से हम।


पहचान क्या हमारी है अपनो को है पता

आओ तो पूछते हैं किसी अजनबी से हम।


जीना भी एक इल्म है सबको है सीखना

खुद को मिटा रहे हैं बड़ी संजीदगी से हम।


खोते ही जा रहे हैं हम खुद अपने आप से

रहते ही अब कहां हैं यहां आदमी से हम।


सबको है समझना यहां दुनिया का कायदा

मोहलत जरा सी ले लें चलो आवारगी से हम।

Monday, September 13, 2021

दृश्य और परिदृश्य


जो दिखता है

या दिखाया जाता है 

आवश्यक नही ;

वो सत्य और उचित हो

या सामयिक भी हो।

जो हम देखते हैं ;

वो तो महज दृश्य है। 

क्या है दृश्य के पार ?

क्या होगा दृश्य के बाद?

क्या पता , किसे पता ?

इसलिये आवश्यक है ;

दृश्य देखते समय

बीच मे कभी कभी 

गर्दन घुमाते रहना

अनुभव करते रहना

अपने आस -पास का 

और चारों  तरफ का 

और  देखते रहना

केवल दृश्य नही

परिदृश्य भी।

Thursday, September 9, 2021

गर चांद जमी पर आ जाये।

        


शायर भी कहते रहते हैं।

आशिक भी कहते रहते हैं।

इश्क को साबित करने मे 

वो अपनी जान लड़ा देंगे।

महबूब अगर  उनका कह दे

तो चांद जमी पर ला देंगे।


वैसे तो  सिर्फ कल्पना है

सोचिये अगर ये हो जाये।

अतिशयोक्ति मे जो है कही गयी

पल भर भी वो सच हो जाये।

सारा भूगोल उलट जाये।

गर चांद जमी पर आ जाये।


सूरज बेचारा तरसेगा 

उस पहर किसे वो चमकाए।

करतब दिन-रात बदलने का

कैसे भला वो दिखलाये।

उसका सब खेल बिगड़ जाये

गर चांद जमी पर आ जाये।


सब तारे और सितारे भी

बिन चांद अकेले पड़ जायें।

इस विकट वियोग मे आखिर वो

कैसे फिर खुद को चमकाएं

बस याद मे वो भी मुरझाएं

गर चांद जमी पर आ जायें।


सागर की मचलती लहरें भी

ऊंचे उठने को तरस जायें।

जब चांद नही होगा ऊपर

तब ज्वार भला कैसे आये।

सागर भी सिथिल सा पड़ जाये।

गर चांद जमी पर आ जाये।


होने को बहुत हो सकता है

गर ऐसा कुछ भी हो जाय।

शायर व आशिक की बातों का

साहित्यिक आनन्द लिया जाये।

ये तो बस एक कल्पना है

कि चांद जमी पर आ जाये।


Monday, August 30, 2021

उदगार

 देख किसी का कष्ट आँख से जिनके आंसू बहा नही।

वो क्या समझे पर पीड़ा जिसने है पीड़ा सहा नही।


निकले जो उदगार लबों से वो दुनिया ने जान लिया

क्या भविष्य उन शब्दों का जो होंठों ने है कहा नही।


गैरों से जो भी जख्म मिले उसकी तो कोई  बात नही

पर अपनों से जो दर्द मिले कोई उसकी इन्तहा नहीं।


बस्ती मे रहने वालों पर जब महलों की है नजर पड़ी 

बेघर हो गये रहने वाले बस्ती मे अब कोई रहा नहीं।


अच्छाई और बुराई का संग युगों युगों तक साथ रहा

हैं एक दूसरे के पूरक दोनो दुनिया मे ऐसा कहां नहीं।

Wednesday, August 18, 2021

चलो गांव की ओर

                     


दूर गगन की छांव मे।

चलो किसी भी गांव मे।

खेतों मे हम चल कर देखें

पनही ना हो पांव में।

दूर गगन ..........


पेड़ों की हरियाली हो।

पवन खूब मतवाली हो।

गांव के बाहर नदी बहे

बैठें लकड़ी की नाव मे

दूर गगन ........


ग्राम्य माहौल मे जीना हो।

तन पर जरा पसीना हो।

सुख सुविधा से दूर रहें 

हम बैठे ठाँव-कुठाँव मे।

दूर गगन ..........


गाव के हम चौपाल मे बैठें।

शौक पुराना पाल के बैठें।

हार जीत की बाजी हो

सब दुख हारें हम दांव मे।

दूर गगन ........

परम सत्य

 सर्वविदित है सर्वमान्य है 

दुनिया मे ये तथ्य।

सत्य मे ही ईश्वर बसता है 

और ईश्वर मे सत्य।


ना ईश्वर किसी ने देखा है

ना ही देखा है सत्य।

पर सत्यता यही है दोनो मे  

कोई नही असत्य।


सत्य की परिभाषा वही है 

एक वही है सत्य।

सृष्टि का स्वामी  वही है

किसका है आधिपत्य?


सत्यों मे सबसे बड़ा है 

जीवन - मरण का सत्य।

आया है वो जायेगा ही 

कोई नही अमर्त्य ।

Thursday, July 29, 2021

यादों के बादल

                 


तुमसे मिलने को जमाना हो गया

इश्क अपना भी पुराना हो गया।


तेरे यादों के हैं बादल छा गये 

और मौसम भी सुहाना हो गया।


प्यार शर्तों पर मुझे तुमने किया 

ये तो हमको आजमाना हो गया।


आये तुम मुँह फेर के चल भी दिये

रस्म मिलने का निभाना हो गया।


कुछ ना बोले बस जरा सा हंस दिये

राज दिल के यूं  छुपाना हो गया।

दुनिया है एक रंगमंच

                             


दुनिया के इस रंगमंच पर सिर्फ एक किरदार हैं हम।

डोर आत्मा की ऊपर है महज एक आकार हैं हम।


कोई भी साथ नही देगा कुछ ऐसी व्यवस्था है उसकी

उस सबसे बडी अदालत के खुद अपने पैरोकार हैं हम।


हम सबके जीवन नैया का असली नाविक एक ही है

बस उसकी दिशा बदलने  को सिर्फ एक पतवार हैं हम।


ये बात तो बिल्कुल निश्चित है कर्मों से भाग्य बदलता है

हमने जैसे हैं कर्म किये वैसे फल के हकदार हैं हम।


हम से ही बनती है दुनिया हमसे ही बनता है समाज 

इस रंग बदलती दुनिया के सब रंगों का आधार हैं हम।

Sunday, July 18, 2021

इन्द्रधनुष सा ख्वाब तुम्हारा

               


थकी हुई आंखें जब मेरी 

गहरी नींद मे सो जाती हैं।

दिल की शान्त दीवारें भी जब

याद मे तेरी खो जाती हैं।

रात सुहानी गाती है जब

मध्यम मध्यम राग तुम्हारा।

दबे पांव फिर आ जाता है

इन्द्रधनुष सा ख्वाब तुम्हारा।


बोझिल सी आंखें मेरी जब

पलकों का भार न सह पाती हैं।

तुम्हे देखने की ख्वाईश मे

शाम ढले ही सो जाती हैं।

पलकों के अन्त: पृष्ठों पर

लिख जाता है नाम तुम्हारा।

चुपके से फिर आ जाता है

इन्द्रधनुष सा ख्वाब तुम्हारा।

Sunday, July 11, 2021

हे लोकतन्त्र कहां हो तुम

                    


हे प्रजातन्त्र अब कहां हो तुम।

हे लोकतन्त्र अब कहां हो तुम।


ये तो नही  तेरी परिभाषा। 

फैली चारों तरफ हताशा।

तुमसे तो उम्मीद बहुत थी

फिर तुम क्यों दे रहे निराशा।

झूठी लालच मे जा बैठे

हे जनतन्त्र अब कहां हो तुम।

हे लोकतन्त्र अब कहां हो तुम।


जनता की आवाज बनो तुम।

सबका कल व आज बनो तुम।

सिर्फ तुम्हे अधिकार है इसका

वतन का तख्तो-ताज बनो तुम।

अपनी ताकत को पह्चानो

हे गणतंत्र अब कहां हो तुम।

हे प्रजातन्त्र अब कहां हो तुम।


जनता की सरकार रहे।

द्वारा जनता सरकार रहे।

जनता की आवाज समझ

जनता के लिये सरकार रहे।

सच्ची परिभाषा तो यही है

ऐसे लोकतन्त्र कहां हो तुम

हे गणतंत्र अब कहां तुम।

हे जनतंत्र अब कहां हो तुम।

Thursday, July 8, 2021

जीवन सफर

 

                


जीवन सफर मे आगे बढ़ना है इतना आसान नही।

सही समय पर सही राह को चुनने का यदि ज्ञान नही।


किसे पता किस मोड़ पे कोई हमको धोखा दे जाये

कौन भला है कौन बुरा है गर इसकी पहचान नही।


जीवन के हर मोड़ पे राहें अलग दिशा दिखलाती हैं

अनुभव देती इन राहों से रहना हमको अंजान नहीं ।


सभ्य सफल जीवन का एक मूल मंत्र तो यह भी है 

अपने मुख से अपना ही करना कभी बखान नही।


वैसे ही कहने को तो लोग किसी को कुछ भी कहें

पर सच्चे अच्छे कर्म बिना बनता कोई महान नही।

Saturday, July 3, 2021

भूलना तुम्हे

                 


भूलता हूं तुम्हे फिर मैं तुम्हे ही याद करता हूं।

किसी तस्वीर मे जैसे कोई मैं  रंग भरता हूं।


साथ होते हो तुम मेरे तो अक्सर ये भी होता है

जाने कितनो की नजरों मे तो मैं यूं ही अखरता हूं।


तुम्हारा नाम लिखा ही दिखायी मुझको देता है

मैं अपने दिल की दीवारों से होकर जब गुजरता हूं।


तजुर्बें  सब मोहब्बत के मुझे इतना सुनाते हैं

कि अब इस राह पे तो मैं बहुत डर डर के चलता हूं।


जमाने भर की नजरों से मोहब्बत को बचाना है

तुम्हारा साथ ना छूटे कभी मैं यूं ही डरता हूं।

Saturday, June 26, 2021

कुछ कहा तुमने : एक गजल

           


                    

तुमने कुछ प्यार से कहा मुझको

मिल गयी दर्द की दवा मुझको।


मुस्कराकर जो तुमने देखा है

लग गयी इश्क की हवा मुझको।


तेरे लहराते हुए दामन ने

जैसे चुपके से है छुआ मुझको।


शाम से है उदास दिल मेरा 

तू भी अपनी कुछ सुना मुझको।


प्यार की बात ना करूं तुमसे 

ऐसा कुछ तो नही हुआ मुझको।


तुम मेरे साथ हो तो रहता है

जाने किस बात का गुमां मुझको।


इश्क एक रोग हो गया जैसे 

दे रहे लोग अब दुआ मुझको।

Friday, June 25, 2021

मालिक तो वही है : एक गजल

                       


वो तो मालिक ही जाने उसका उसूल क्या है।

सजा देता है पर बताता नही कि भूल क्या है।


सब नेकियां अपनी मै सूद मे लिखा दूं लेकिन

कर्जदार हूं उसका पता नही कि मूल क्या है।


बेवजह तो इस जहां मे उसने कुछ ना बनाया 

इन्सान क्यों कहे  जरूरी क्या फिजूल क्या है।


खुद के हिस्से के सभी कर्म निभाते जाओ

वो तो कहेगा नही कि उसको कुबूल क्या है।


मंजिल की दिल मे धुन हो और सोच हो सही

फिर राह मे कुछ भी मिले कांटे या फूल क्या है।

Saturday, June 19, 2021

शिकवा और शिकायत

                        

जो गुस्से मे कहा तुमने वो हंस के कहा होता।
तो आंसू मेरी आंखों से बेवजह न बहा होता।

क्या चीज बेरुखी है तुम भी तो जान पाते 
जो दर्द सहा मैने वो तूने भी सहा होता।

खत मेरे लिखे तुम तो यूं ही ना जला देते
इक बार उन्हे तुमने जो दिल से पढा होता।

हर बात भुलाकर तुम एक बार मिले होते
तो दरमियां हमारे शिकवा ना रहा होता।

उलझी हुई हमारी हर बात सुलझ जाती
कुछ तुमने कहा होता कुछ हमने कहा होता।

Thursday, June 10, 2021

अजीब दौर है : एक गजल

                   


हर शख़्स के जुबां पर इतना सवाल क्यूं हैं।

इस दौर मे बात बात पर इतना बवाल क्यूं हैं।


किसी को किसी पर भी यकीं क्यों नही रहा 

यहां हर शख्श का अलग ही ख्याल क्यूं है।


जो मिल गया उस पर तो कभी सब्र ना किया

जो मिल न सका उसका इतना मलाल क्यूं है।


इन्सान की गुस्ताखियाँ इस अंजाम तक पहुंची

वर्ना तो इस जहाँ का ये सूरत-ए-हाल क्यूं है


दावा तो करते फिरते हो कि दुश्मनी नही मुझसे

फिर चेहरे का रंग सामने आने पे लाल क्यूं है।

याद , एहसास और प्यार

                    


           ( 1 )

थोड़ा ही मिले तुम पर बहुत कुछ खो गया।

हमे देखे हुए तुमको एक मुद्दत सा हो गया।

यादों मे भी हो आहों मे ख्वाबों मे भी तुम हो

तुम्हे फिक्र ही क्या है किसी को क्या हो गया।

                      ( 2 )

अल्फाज पढ लिया मेरे एहसास न समझे।

दिल के मेरे तुम हो कितना पास न समझे।

सब कह दिया मैने अब है कुछ नही बाकी

मैने तुम्हे समझा है कितना खास न समझे।

                       ( 3 )

मिल जाओ कभी तुम तो मैं तुमको बताऊं।

हाल-ये-दिल अपना कभी मैं तुमको सुनाऊँ। 

तुमसे ये मेरा प्यार कभी भी कम नही होगा

जता चुका हूं सौ बार फिर एक बार जताऊं।

वह तो एक परमशक्ति है।

                     


कौन है जो निर्णय लेता है।

उसके मन से सब चलता है।।

सारे ग्रहों पर उसका वश है।

उसके आगे सब बेबस हैं।।

सारी सृष्टि है वही बनाता।

प्रलय विनाश वही है लाता।।

पंच तत्व से बनी ये काया।

सब कुछ है उसकी ही माया।। 

जीव जन्तु पेड़ या पौधे।

सब मे ही वो जीवन भर दे।।

धूप छांव सब वो करता है।

नदिया सागर वो भरता है।।

देता वही वही सब हरता।

पाप पुण्य की गणना करता।।

किसके साथ कब क्या होना है।

कब जीना है कब मरना है।।

नही किसी को इसका ज्ञान।

दुनिया इन सबसे अंजान।।

पर जो है इन सब का ज्ञाता।

जो भी है सबका निर्माता।।

वह तो एक  परम शक्ति है।

सबकी ही  उसमे भक्ति है।।

दे ना सकूं मैं उसकी आख्या।

कैसे करूं मै उसकी व्याख्या।।

नही है मुझमे इतना ज्ञान।

वो है महान सर्व शक्तिमान।।

जैसा जिसके समझ मे आये।

नतमस्तक वैसा हो जाये।।

Friday, May 28, 2021

तुम ही तुम

                     


तुम हो तुम्हारी खुशी है।

इसके सिवा कुछ नही है।

तुम साथ हो तो है क्या गम

सब कुछ मेरा बस यही है।


दिल मे है तस्वीर तेरी

आंखों मे सपने तुम्हारे

दुनिया से हमको क्या लेना

मेरी तो दुनिया तू ही  है।


जब तक थे तुम साथ मेरे

दुनिया ये कितनी हँसीं थी

जबसे हो तुम  साथ छोड़े 

सब कुछ वहीँ का वहीँ है।


दिल तो अकेला कभी भी

रहता नही है किसी का 

दिल इस जहां मे सभी का

लगता कहीं ना कहीं है।

Thursday, May 27, 2021

ये जीवन है

                  


 जैसा हम चाहेंगे सब कुछ वैसा तो नही होना है।

जीवन की परिभाषा मे कुछ पाना कुछ खोना है


जो बोवोगे वो काटोंगे जीवन की जब रीति यही

तो फिर हमको कर्म कृषि मे अच्छी फसलें बोना है।


छोड़ निराशा आशाओं की आओ हम सब बात करें

अच्छे वक्त भी आएँगे ही फिर किस बात का रोना है।


रंगमच की कठपुतली हैं डोर तो कोई और लिये है

उसकी धुन पर नाच रहे हम केवल एक खिलौना हैं।


सब कुछ छोड़ के जाना होगा ऐसा दिन भी आयेगा

कर्म हमारा चादर है और जीवन एक बिछौना है।

Friday, May 21, 2021

हे मानव रूपी गिद्धों


               

ईश्वर ने  दिया है जन्म तुम्हे कुछ अच्छे कर्म करो।

हे मानव रूपी गिद्धों  तुम कुछ तो शर्म करो।


एक दिन वो भी आयेगा तुम खुद ही पछताओगे 

फिर सर पटकोगे अपना पर कुछ ना कर पाओगे

क्यों पत्थर दिल बन बैठे दिल कुछ तो नर्म करो।

हे मानव रूपी..........


स्वर्ग नर्क कुछ भी है नही ये सब है मन का फेरा 

सब कुछ ईश्वर का ही है क्या तेरा और क्या मेरा

ईश्वर ने दिया है अवसर तो कुछ तो धर्म करो।

हे मानव रूपी .......


हम मानव हैं हमको तो मानवता दिखलाना होगा

पर-सेवा का पाठ हमे खुद को सिखलाना होगा

मानव सेवा मे आओ खुद को सरगर्म करो।

हे मानव रूपी ......

नीला आस्मां सो गया

           


नीला आस्मां सो गया।

देख इस कदर सब रोते बिलखते लोग

अपनो को खोते हुए और सिसकते लोग 

हर किसी के साथ वो भी रो गया।

नीला आस्मां सो गया।


देख सब बेबस यूं ही विचरते लोग

दवा से हवा से बेहद तरसते लोग

कुछ ना बोला बस उन्ही मे खो गया।

नीला आस्मां सो गया।


अपनों की सांसों मे सांसे मिलाते लोग

एक बुझते दीप को कुछ यूं जलाते लोग

सोच इस जहां मे ये क्या हो गया।

नीला आस्मां सो गया।


देख बहती आंखों के आंसू सुखाते लोग

सांस टूटी हाथों से हाथें छुड़ाते लोग

यूं जहर इस हवा मे कौन कैसे बो गया।

नीला आस्मां सो गया।


ऊपर बैठा है जो अपनी कृपा बरसायेगा 

वो दिंन भी आयेगा सब कुछ सही हो जायेगा

बस इसी उम्मीद मे सारा जहाँ है खो गया।

नीला आस्मां सो गया।

Tuesday, May 11, 2021

हर तरफ धुंआ सा है।

                    


हर तरफ क्यूं धुंआ धुंआ सा है।

कुछ न कुछ तो कहीं  हुआ सा है।


जिसको रखते हैं हम दुवाओं  मे

दे रहा क्यूं वो बद्दुवा सा है।


वो जो रहता मेरे ख्यालों मे

जैसे उसने मुझे छुआ सा है।


रोजनामों की हर खबर पढकर

दिल मेरा आज कुछ बुझा सा है।


कौन समझा है जिन्दगी अपनी

जीना मरना भी एक जुआ सा है।

Saturday, May 1, 2021

पत्थर के भगवान

                        


सब जान के भी तुम भी अंजान बने हो।

सुनते है की पत्थर के भगवान बने हो।


हर वक्त बेरुखी भी अच्छी नही होती

तुम ही तो मेरा दिल व मेरी जान बने हो।


अब छोड़ मेरे  दिल को जाना न तुम कभी

मुद्दत से मेरे दिल के तुम मेहमान बने हो ।


अब लोग जानते हैं तेरे नाम से मुझे 

महफिल मे तुम ही मेरी पहचान बने हो।


जज्बात मोहब्बत का समझी ना कभी है

रुख देख जमाने का क्यूं हैरान बने हो।

Thursday, April 22, 2021

दूरियां क्यों ?

                    


इश्क कुछ यूँ जता रहे हो तुम।

दूर हम से ही जा रहे हो तुम।


कोई शिकवा नही अगर मुझसे

बेरुखी क्यों दिखा रहे हो तुम।


हमसफर तुम थे हमनवा भी थे

आज दामन छुड़ा रहे हो तुम।


आंखों आंखों मे बात होती थी

आज आंखें चुरा रहे हो तुम।


दूर जाने की जिद तुम्हारी है

अश्क फिर क्यूं बहा रहे हो तुम।

Sunday, April 18, 2021

पारिवारिक दोहे ( पत्नी - महिमा )

                       


पत्नी सेवा धर्म है सुन लो सब इन्सान।

यदि पत्नी प्रसन्न है घर है स्वर्ग समान।


किचन काम आता जिन्हे वो हैं पति महान।

पत्नी के संग हाथ बटाएं दुनिया करे बखान।


बड़े से बड़े  सूरमा पत्नी से सकें ना जीत।

घर के बाहर  शेर हैं घर मे हैं भयभीत।


चाहे जो भी राज हो पत्नी लेगी जान।

जासूसी ऐसी करे नतमस्तक भगवान।


दशा दुर्दशा ना बने ये है अपने हाथ ।

जीवन भर देते रहें एक दूजे का साथ ।


एक बात बस और है सुन लो कान लगाय ।

घर की बात घर मे रहे बाहर कभी ना जाय।

Friday, April 16, 2021

क्योंकि गरीब है वो

                       


क्योंकि गरीब है वो 

भूख से प्यास से 

जमाने की दी हुई 

तसल्ली और आस से 

बेहद करीब है वो

क्योंकि गरीब है वो ।


क्या किया कितना किया

अब तलक कैसे जिया

बस यही सब नापता 

बेबस जरीब है वो

क्योंकि गरीब है वो।


कर्म से धर्म से 

दर्द जो उसको  मिला

उन सभी के मर्म से

अपना ही  नसीब है वो

क्योंकि गरीब है वो।


कर्ज से फर्ज से 

अनगिनत दर्द से 

खुद को टांगने के लिये

उठाता सलीब है वो

क्योंकि गरीब है वो

Saturday, April 10, 2021

सुख-दुख जीवन के दो पहलू

      


विकट समस्या है हम सब की

क्या भूले क्या याद करे 

अच्छे बुरे की मकडजाल से

खुद को कैसे आजाद करे।


जो बीत गया सो बीत गया

अब उस पर इतनी चर्चा क्यों 

जो वक्त हमारे आगे है 

आओ हम उसकी बात करें।


कठिन समय पर खुश रहने की

कला सीखना बहुत जरूरी

दुख के जलते शोलों पर हम

खुशियों की बरसात करें।


सुख-दुख जीवन के दो पहलू

एक गया तो दूजा आया

दुख को गले लगा कर आओ

एक नयी शुरुआत करें।

Saturday, March 27, 2021

तुम्हारी कमी रह गयी

                           


आस्माँ मिल गया है जमीं रह गयी

जिन्दगी मे तुम्हारी कमी रह गयी।


अश्क सारे हमारे खतम हो गये

बस आंखों मे थोडी नमी रह गयी।


तुम गये जिन्दगी से तो ऐसा लगा

धडकने भी थमी की थमी रह गयीं।


मैने चाही नही थीं मगर दूरियां 

दरमियांं तेरे मेरे बनी रह गयीं ।


तुम मिले भी नही और जुदा हो गये

मेरी किस्मत की मुझसे ठनी रह गयी।

हम कुम्हार अपनी माटी के


हम कम्हार अपनी माटी के 

चाहे जैसा रच लें खुद को 

चाहे करें निर्माण हम अपना 

या फिर करें विनाश स्वंय का।


ये जीवन संसार भरा है

कितनी ही विविधाओं से 

पर उनमे से लेना क्या है

अच्छा हो चुनाव स्वंय का।


दिशा हमारी सही रही तो

सफल तो हम हो जायेंगे ही

जब तक लक्ष्य प्राप्त ना कर लें

हो न कभी विश्राम स्वयं का।


देश और मानव सेवा मे 

हम ऐसा कोई काम करें 

हम पर गर्व करे हर कोई

हो समाज मे नाम स्वयं का।

Saturday, February 27, 2021

एक प्यारा सा एहसास हो तुम

              


शब्दों अर्थों  के सहारे ही

दिल का मेरे आभास हो तुम।

बस इतना लिखता हूं मै तुम्हे

कि मेरे लिये कुछ खास हो तुम।

 

आंखों से थोड़ा दूर सही 

दिल मे स्थान तुम्हारा है

दिल ने जब भी तुम्हे याद किया 

यूं लगा कि मेरे पास हो तुम।


हाथों मे हाथ तुम्हारा हो 

कुछ पल को मेरे साथ रहो

बस इतनी सी एक चाहत है 

इस चाहत का एक आस हो तुम।


दिल ने मेरे जब प्रश्न किया 

सम्बंद्ध मेरा क्या है तुमसे

सम्बंद्ध मेरा तुम से कुछ  हो 

एक प्यारा सा एहसास हो तुम।

रिश्तों की व्याख्या

                    


दिल मेरा लिखने बैठा जब

व्याख्या हमारे रिश्तों की 

संदर्भ और प्रसंग मे तो 

कुछ तुम्हे लिखा कुछ मुझे लिखा

फिर क्रम आया जब व्याख्या का

वो ठिठक गया कि लिखूं क्या

क्या रिश्ता मेरा तुमसे है

क्या रिश्ता मुझसे है तेरा

दिल को जब कुछ पता नही

तो सच ही है वो लिखता क्या

फिर दिल से  मैने यही कहा

व्याख्या मे तुम बस प्यार लिखो

प्यार तो बस प्यार ही है

इसका ना कोई आधार लिखो

केवल इतना लिख कर आगे

तुम सीधा उपसंहार लिखो

उसमे भी गर कुछ लिख न सको

उपसंहार मे भी बस प्यार लिखो।

उपसंहार मे भी बस प्यार लिखो।

Friday, February 26, 2021

व्यवस्था का रंगमंच

                 


व्यव्स्था के रंगमंच पर

पहला पर्दा इमानदारी का

दूसरा इसके विलोम का 

पहले पर्दे की आड़ मे

लहराता उसका विलोम

प्रतीक्षा मे दर्शक 

खुलेगा पर्दा और 

दिखेगा नाटक इमानदारी का 

पर दोनो पर्दे एक साथ उठे

सूना रंगमंच व्यवस्था का

सिर्फ दिखे उठते गिरते पर्दे

नही दिखे पर्दे खींचने वाले भी

सिर्फ दिख रहे मूक दर्शक

और सुनायी दे रहा 

नेपथ्य से कोई शोर

दीप यादों के जलाना होगा

                           


प्यार हमसे जो किया है तो निभाना होगा

दिल मे जो भी है तेरे हमको बताना होगा।


मिल ही जाएगी हमें प्यार की मंजिल अपनी

बस हमें दिल के रास्ते से ही जाना होगा।


प्यार दुनिया को कभी भी ना रास आया है

इसे दुनिया की निगाहों से बचाना होगा।


प्यार तो प्यार है कोई आग का दरिया तो नही

लोग कहते हैं जिसमे डूब के जाना होगा।


रोशनी प्यार की मध्यम न कभी हो पाये 

दीप यादों के हमे दिल मे जलाना होगा।

Monday, February 15, 2021

हे मां वीणा वादिनी

 


हे मां वीणा  वादिनी , तुम कष्ट हरो माता।

ज्ञान बुद्धि विद्या से , तुम हमको भरो माता।


वैसे तो निस दिन ही ,  हम ध्यान तुम्हे धरते, 

ऋतु बसंत दिन पंचमी , विधि से पूजा हम करते,

श्वेत कमल पर आसन हो , तुम कृपा करो माता।

ज्ञान बुद्धि विद्या से , तुम हमको भरो माता।


ब्रम्हा  विष्णु और महेश , सब तुम्हे पूजते हैं,

ज्ञान कला विद्या की , देवी  तुम्हे मानते है,

श्वेत वस्त्र व तुषार हार है तुमको बहुत भाता।

ज्ञान बुद्धि विद्या से ,  तुम हमको भरो माता।


राजहंस पर हो सवार वीणा-पुस्तक हो हाथ मे, 

कर के मध्य निवास तुम्हारा दया तुम्हारी साथ मे,

निस दिन कर वन्दना तुम्हारी उच्च प्रगति पाता।

ज्ञान बुद्धि विद्या से , तुम हमको भरो माता।

Wednesday, January 20, 2021

जीवन सागर

 


थकना नही है रुकना नही है

चलते ही चलते रहना है।

चाहे सुख मिले या दुख मिले

हंस कर उसे हमे सहना है।


जीवन सागर के लहरों मे 

बाधाएं  तो आएँगे ही 

बाधाओं  से लड़ कर ही तो

निस दिन आगे बढ़ना है।


कुछ ना कुछ तो लक्ष्य बनायें

हम अपने इस जीवन का 

फिर उसको पाने की खातिर

कोशिस करते रहना है।


पाप पुण्य का लेखा जोखा 

इसका कोई अर्थ नहीं  पर

जैसी करनी वैसी भरनी 

ये तो सबका कहना है।

चलते ही चलते रहना है।