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Saturday, August 19, 2023

तुम , new 4

सागर की गहराई में तुम

पर्वत की ऊंचाई में तुम।

प्रश्नों और जवाबों में तुम

आते जाते ख्वाबों में तुम।

पुष्पों और लताओं में तुम

मेरी हर कविताओं में तुम।

सांसों में तुम यादों में तुम

सुबह शाम फरियादों में तुम।

झिलमिलाती लड़ियों में तुम

फूलों की पंखुड़ियों में तुम।

अंधेरों और उजालों में तुम 

ख्वाबों और ख्यालों में तुम।

मेरे दिल की बातों में तुम

और चांदनी रातों में तुम।

हर बंधन हर फेरों में तुम

मेरी गजल के शेरों में तुम।

हर रास्ते हर राहों में तुम।

मंजिल और पनाहों में तुम।

आशा और निराशा में तुम

रिश्तों की परिभाषा में तुम।

प्रश्न है किन रिश्तों में तुम

दुनिया के हर रिश्तों में तुम।

Sunday, August 13, 2023

स्मृतियों के आयाम New 3

डालियां जब झूमती हों एक लय में।

सूर्य भी संकोच करता हो उदय में।

रूप यादों का लिए संग धड़कनों के

आ ही जाता है कोई मेरे हृदय में।


पुष्प आशाओं के तमाम लेकर।

स्मृतियों के नए आयाम लेकर।

भेज यादों को स्वप्नों के विलय में।

आ ही जाता है कोई मेरे हृदय में।


स्वप्न यदि तुम आए हो तो यूं न टूटो।

साथ दो कुछ और पल यूं न छूटो।

देख मन को इस अनुनय -विनय में

आ ही जाता है कोई मेरे हृदय में।

वाइज की ये बातें हैं। New 2

 वो लोग जिनके हिस्से में गम नही आते।

अफसोस ऐसे लोगों में हम नही आते।


आंखों से भला अश्कों का हिसाब क्या करें।

ज्यादा ही चले आते है क्यों कम नहीं आते।


चलना ही पड़ता है हमे मंजिल की राह में

खुद अपने आप राह में कदम नही आते।


रिश्तों का बिगड़ना तो मुमकिन ही नही था

गर बेवजह ही दरमियाँ वहम नही आते।


वाइज़ से पूछता हूं मयकदे का रास्ता

जिस रास्ते में दैर-ओ-हरम नही आते।

जिस रास्ते में दैर-ओ-हरम नही आते।

आया है यहां कौन ठहरने के वास्ते New -1

आया है यहां कौन ठहरने के वास्ते।

जीते ही जा रहे हैं मरने के वास्ते।


मोहलत जरा सी दे दे ये जिंदगी हमे

कुछ काम हैं बचे अभी करने के वास्ते।


सूरज की रोशनी तो निकलती है झूम के 

बस खुल के आसमां में बिखरने के वास्ते।


वादों पे कभी यूं ही एतबार ना करें

अक्सर तो ये होते हैं मुकरने के वास्ते।


मेहनत भी जरूरी है दुवाओं के अलावा

किस्मत की लकीरों को संवरने के वास्ते।

किस्मत की लकीरों को संवरने के वास्ते।