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Friday, September 18, 2020

जाने कितने रूप तुम्हारे


जाने कितने रूप प्रेम के 

किसने समझा किसने जाना

चाहे वो कितने हो लेकिन

एक रूप मे तुम भी हो।

हृदय एक है गहरा सागर 

जाने कितनी लहरें उसमे 

उन उठती गिरती लहरों मे

एक लहर मे तुम भी हो ।

कोई  सिरा नही है मन का 

कहां से उठता कहां निकलता 

लेकिन उसके किसी सिरे पर 

किसी रूप मे तुम भी हो ।

रात गगन मे कितने तारे

किसने जाना किसने देखा 

उन्ही असंख्य तारों मे देखो 

एक सितारा तुम भी हो।

दिल की तुम हर बात लिखो


ये मत सोचो क्या लिखना है 
दिल की तुम हर बात लिखो ।
जीवन एक शतरंज बना है
उसका शह और मात लिखो।

आँख बन्द कर मन से देखो 
कैसा चित्र उभरता उसमे 
उन चित्रों मे छुपे हुए जो
सारे झंझावात लिखो ।

घोर निराशा के बादल से 
बाहर जरा निकल कर देखो
जीवन को वरदान समझ तुम
जीवन की सौगात लिखो ।

जीवन पथ पर याद रखो तुम
सुख और दुख दोनो ही मिलेंगे
रात बीत जाने पर देखो 
होता है प्रभात लिखो।
दिल की तुम हर बात लिखो।

यादें कितनी


 याद है मुझको तेरे प्यार की बातें कितनी 

और वो तुमसे हुई पिछ्ली मुलाकातें कितनी।

बिन बताये ही चली आती हो तुम यादों मे 

मैने काटी हैं जाग जाग के रातें कितनी ।

क्या पता कैसे जमाना भी इससे वाकिफ है

बात है प्यार की हम इसको छुपाते कितनी।

है पता मुझको मेरे पास तुमको आना है 

यूँ तो सब लोग बनाते है बस  बातें कितनी ।

तुम्हे तो जिद थी बस हमसे दूर जाने की 

और हम तुमको अवाज लगाते कितनी।