
जाने कितने रूप प्रेम के
किसने समझा किसने जाना
चाहे वो कितने हो लेकिन
एक रूप मे तुम भी हो।
हृदय एक है गहरा सागर
जाने कितनी लहरें उसमे
उन उठती गिरती लहरों मे
एक लहर मे तुम भी हो ।
कोई सिरा नही है मन का
कहां से उठता कहां निकलता
लेकिन उसके किसी सिरे पर
किसी रूप मे तुम भी हो ।
रात गगन मे कितने तारे
किसने जाना किसने देखा
उन्ही असंख्य तारों मे देखो
एक सितारा तुम भी हो।

