कागज़ के एक पन्ने पर
तुम्हारे नाम के नीचे लिखे
इधर उधर बेतरतीब से
कुछ बिखरे हुए शब्द ,
कुछ अपूर्ण वाक्य।
साक्षी हैं इस बात के
कि कुछ तो लिख गया।
कुछ लिखने से रह गया।
ENJOY READING, GO IN DREAMS
कागज़ के एक पन्ने पर
तुम्हारे नाम के नीचे लिखे
इधर उधर बेतरतीब से
कुछ बिखरे हुए शब्द ,
कुछ अपूर्ण वाक्य।
साक्षी हैं इस बात के
कि कुछ तो लिख गया।
कुछ लिखने से रह गया।
कभी कभी
दो चार शब्द भी
सिर्फ शब्द नही होते।
उनमें छिपी होती है
संवेदनाओं से सजी,
भावनाओं से परिपूर्ण,
एक संपूर्ण किताब।
शब्दों को पढ़ने से
समझ में आते हैं
सिर्फ उनके अर्थ।
शब्दों और अर्थों के
अप्रत्याशित द्वंद में,
अछूती रह जाती हैं
शब्दों में समाहित
असीमित और
अपरिभाषित
निर्दोष भावनाएं।
हे परमेश्वर, मेरे ईश्वर
तुम्ही हो, तुम्ही हो, तुम्ही हो कर्णधार
हे परमेश्वर -------
नतमस्तक हैं तुम पर तो हम
तुम्ही हो, तुम्ही हो, तुम्ही हो पालनहार
हे परमेश्वर ----
हम तो कुछ भी नही तेरी, चरणों के धूल हैं।
तुमको अर्पित करते हम, श्रद्धा के फूल हैं।
दया करो तुम, कष्ट हरो तुम
हम पर कृपा करो तुम।
हे परमेश्वर -------
तुम्ही हो, तुम्ही हो,तुम्ही हो पालनहार
हे परमेश्वर ------
जीवन की राह कठिन है, हर पल तुम साथ रहना
जब भी हम भूलें भटकें, तुम सर पे हाथ रखना।
तुम ही हो बस एक सहारा
तुम ही एक किनारा
हे परमेश्वर ----
तुम्ही हो, तुम्ही हो, तुम्ही हो कर्णधार
हे परमेश्वर ----
अपने कर्तव्य मार्ग पर, हरदम चलते रहें हम।
ऐसा वरदान हमें दो, आगे बढ़ते रहे हैं हम।
ध्यान तुम्हारा सदा करें हम
तुमको नमन करें हम
हे परमेश्वर ------
तुम्ही हो, तुम्ही हो, तुम्ही हो पालनहार
हे परमेश्वर, मेरे ईश्वर
तुम्ही हो, तुम्ही हो, तुम्ही हो कर्णधार
हे परमेश्वर -------
चूहे पड़े हैं सुस्त सब शातिर हैं बिल्लियां।
दुनिया उड़ाएगी ही चूहों की खिल्लियां।
कितने हों खूबसूरत दरवाजे काठ के
निगरानी तो करेंगी ताले व किल्लियां।
एक टूटी झोपड़ी में रहता है चैन से
जो रोज तोड़ता है पत्थर की सिल्लियां।
ऐसे ही रह जाएगा बदहाल इंतजाम
जब कुर्सियों पे होंगे सब शेखचिल्लियां।
सब रंग ज़माने का दिखेगा साफ साफ
आंखों से हटा दीजिए परदे व झिल्लियां।
जैसे जैसे ये दिन सब गुजरने लगे।
बीते हुए दिन भी अच्छे लगने लगे।
राहों के पत्थरों ने ये काम कर दिया
खा के ठोकर सभी अब संभलने लगे।
दुवाएं दोस्तों की हैं लग रहीं शायद
दिन अपने भी अब हैं बदलने लगे।
धीमे धीमे ही सही बात पहुंची यहां
बात दिल की मेरे वो समझने लगे।
दिल में आए भी वो फिर चले भी गए
मानिंद तिनकों के हम बस बिखरने लगे।