ENJOY READING, GO IN DREAMS


Saturday, November 6, 2021

जीवन एक प्रेम की धारा

         


नदी हमारी नाव हमारा। 

जीवन एक प्रेम की धारा।

नियति नही फिर भी तो वो 

बहता सबके अनुकूल।

बेमौसम ही  खिल जाते हों 

ज्यों गुलाब के फूल।


धारा को है बहते रहना।

बाधाओं के पार उतरना।

स्थितियाँ मौसम की हों

कितनी भी प्रतिकूल।

बेमौसम ही खिल जाते हों

ज्यों गुलाब के फूल।


हँसते और हँसाते रहना।

प्रेम का पाठ पढाते रहना।

राह मे इसके मिल जाएं 

चाहे काँटे या शूल।

बेमौसम ही खिल जाते हों।

ज्यों गुलाब के फूल।

Friday, November 5, 2021

शब्दों की मर्यादा

          


शब्द तो आतुर रहते हैं

जस का तस कह देने को

पर मैने उन्हे मर्यादाओं का

बोध करा के रखा है।


क्या लिखना है उंगलियों को

जिह्वा को क्या बोलना है।

सब कुछ निर्भर है शब्दों पर

निर्भर हैं शब्द अन्तर्मन पर

इन सबके बीच मैने थोड़ा 

अवरोध बना के रखा है।

और मैने उन्हे मर्यादाओं का

बोध करा के रखा है।


बेवजह ना ऊंची हो पाये 

आवाज पे एक नियन्त्रण हो।

जो कष्ट किसी को देते हों

हर बात पे एक नियन्त्रण हो।

इसलिये राह मे इनके एक

गतिरोध बना के रखा है।

और मैने उन्हे मर्यादाओं का

बोध करा के रखा है।