नदी हमारी नाव हमारा।
जीवन एक प्रेम की धारा।
नियति नही फिर भी तो वो
बहता सबके अनुकूल।
बेमौसम ही खिल जाते हों
ज्यों गुलाब के फूल।
धारा को है बहते रहना।
बाधाओं के पार उतरना।
स्थितियाँ मौसम की हों
कितनी भी प्रतिकूल।
बेमौसम ही खिल जाते हों
ज्यों गुलाब के फूल।
हँसते और हँसाते रहना।
प्रेम का पाठ पढाते रहना।
राह मे इसके मिल जाएं
चाहे काँटे या शूल।
बेमौसम ही खिल जाते हों।
ज्यों गुलाब के फूल।

