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Monday, February 7, 2022

एहसास



जब कभी फूलों के गुलशन से मैं होकर गुजरा 

दिल को ऐसा लगा कि मैं तुम्हे छू कर गुजरा।


यूं गुजरने को तो हर वक्त गुजर जाता है

साथ जब तुम थे वही वक्त ही बेहतर गुजरा।


ये तो मुमकिन था कि काँटे मिलेंगे राहों मे 

ऐसी राहों से भी मैं हर कदम हंस कर गुजरा।


तेरे मिल जाने से कदमों को शुकूं आया है

राह-ए-मंजिल से मेरे कोई तो रहबर गुजरा।


हर तरफ भीड़ है एक शोर है दुश्वारी है

खुशी की चाह मे हर शख्स ही जिधर गुजरा।