जब कभी फूलों के गुलशन से मैं होकर गुजरा
दिल को ऐसा लगा कि मैं तुम्हे छू कर गुजरा।
यूं गुजरने को तो हर वक्त गुजर जाता है
साथ जब तुम थे वही वक्त ही बेहतर गुजरा।
ये तो मुमकिन था कि काँटे मिलेंगे राहों मे
ऐसी राहों से भी मैं हर कदम हंस कर गुजरा।
तेरे मिल जाने से कदमों को शुकूं आया है
राह-ए-मंजिल से मेरे कोई तो रहबर गुजरा।
हर तरफ भीड़ है एक शोर है दुश्वारी है
खुशी की चाह मे हर शख्स ही जिधर गुजरा।
