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Saturday, April 10, 2021

सुख-दुख जीवन के दो पहलू

      


विकट समस्या है हम सब की

क्या भूले क्या याद करे 

अच्छे बुरे की मकडजाल से

खुद को कैसे आजाद करे।


जो बीत गया सो बीत गया

अब उस पर इतनी चर्चा क्यों 

जो वक्त हमारे आगे है 

आओ हम उसकी बात करें।


कठिन समय पर खुश रहने की

कला सीखना बहुत जरूरी

दुख के जलते शोलों पर हम

खुशियों की बरसात करें।


सुख-दुख जीवन के दो पहलू

एक गया तो दूजा आया

दुख को गले लगा कर आओ

एक नयी शुरुआत करें।