मछुवारे सभी यह देख कर हंसने लगे हैं।
कि इंसान भी अब जाल में फंसने लगे हैं।
बस बेवजह ही उसने मुंह फेर लिया है
मेरे अहबाब मुझपे तंज अब कसने लगे हैं।
सापों का जहर शायद अब बेअसर सा है
इंसान ही इंसान को अब डसने लगे हैं।
वो जो अक्सर ही पूछते थे खैरियत मेरी
जाने कौन सी दुनिया में अब बसने लगे हैं।
ख्वाबों के कुछ बीज बोए थे कभी हमने
दिल की दीवारों पर वो अब लसने लगे हैं।