ENJOY READING, GO IN DREAMS


Thursday, April 21, 2022

ख्वाब उग रहे आंखों मे

 मन है इतना शान्त व स्थिर

जैसे कोई कमी सी है।

ऐसा कुछ महसूस हुआ कि 

आंखों मे कुछ नमी सी है।

नये सुरीले साज सज रहे 

मद्धम मद्धम सांसो मे। 

पलकें बन्द किया तो जाना

ख्वाब उग रहे आंखों मे।


निचली पलकों के पीछे से 

थोड़ा सा पानी भरती। 

पुतली जैसे सींच रही हो

आंखों की सूखी धरती।

उम्मीदों के फूल खिलेगें

उन ख्वाबों की शाखों मे।

पलकें बन्द किया तो जाना 

ख्वाब उग रहे आंखों मे।

अनमोल वचन : कुछ दोहे

 बातों का ही मोल है तो सच्ची सच्ची बोल।

बाकी सब बेकार हैं बस मानवता अनमोल।


एक छोर पर दिन बसे रात बसे एक छोर।

अन्धियारा मिट जायेगा ज्यों आयेगी भोर।


अपना दोष किसी पर भी ना दीजिये टाल।

दोष है तो फिर मानिये ना हो कोई मलाल।


अपना है कुछ भी नही सब आंखों का फेर।

एक दिन सब लुट जायेगा ना लागेगी  देर।


अपने मुख से अपना ही करना नही बखान।

स्थाई कुछ भी नही फिर किसका अभिमान।


घड़ी घड़ी करते करते घड़ी जायेगी बीत।

साथ ना कोई जायेगा जग की यही है रीत।


जीवन का आरम्भ कहां और कहाँ है अन्त।

भेद ये कोई जान सके कौन है ऐसा सन्त।