मन है इतना शान्त व स्थिर
जैसे कोई कमी सी है।
ऐसा कुछ महसूस हुआ कि
आंखों मे कुछ नमी सी है।
नये सुरीले साज सज रहे
मद्धम मद्धम सांसो मे।
पलकें बन्द किया तो जाना
ख्वाब उग रहे आंखों मे।
निचली पलकों के पीछे से
थोड़ा सा पानी भरती।
पुतली जैसे सींच रही हो
आंखों की सूखी धरती।
उम्मीदों के फूल खिलेगें
उन ख्वाबों की शाखों मे।
पलकें बन्द किया तो जाना
ख्वाब उग रहे आंखों मे।