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Thursday, April 21, 2022

अनमोल वचन : कुछ दोहे

 बातों का ही मोल है तो सच्ची सच्ची बोल।

बाकी सब बेकार हैं बस मानवता अनमोल।


एक छोर पर दिन बसे रात बसे एक छोर।

अन्धियारा मिट जायेगा ज्यों आयेगी भोर।


अपना दोष किसी पर भी ना दीजिये टाल।

दोष है तो फिर मानिये ना हो कोई मलाल।


अपना है कुछ भी नही सब आंखों का फेर।

एक दिन सब लुट जायेगा ना लागेगी  देर।


अपने मुख से अपना ही करना नही बखान।

स्थाई कुछ भी नही फिर किसका अभिमान।


घड़ी घड़ी करते करते घड़ी जायेगी बीत।

साथ ना कोई जायेगा जग की यही है रीत।


जीवन का आरम्भ कहां और कहाँ है अन्त।

भेद ये कोई जान सके कौन है ऐसा सन्त।

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