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Wednesday, August 18, 2021

चलो गांव की ओर

                     


दूर गगन की छांव मे।

चलो किसी भी गांव मे।

खेतों मे हम चल कर देखें

पनही ना हो पांव में।

दूर गगन ..........


पेड़ों की हरियाली हो।

पवन खूब मतवाली हो।

गांव के बाहर नदी बहे

बैठें लकड़ी की नाव मे

दूर गगन ........


ग्राम्य माहौल मे जीना हो।

तन पर जरा पसीना हो।

सुख सुविधा से दूर रहें 

हम बैठे ठाँव-कुठाँव मे।

दूर गगन ..........


गाव के हम चौपाल मे बैठें।

शौक पुराना पाल के बैठें।

हार जीत की बाजी हो

सब दुख हारें हम दांव मे।

दूर गगन ........

परम सत्य

 सर्वविदित है सर्वमान्य है 

दुनिया मे ये तथ्य।

सत्य मे ही ईश्वर बसता है 

और ईश्वर मे सत्य।


ना ईश्वर किसी ने देखा है

ना ही देखा है सत्य।

पर सत्यता यही है दोनो मे  

कोई नही असत्य।


सत्य की परिभाषा वही है 

एक वही है सत्य।

सृष्टि का स्वामी  वही है

किसका है आधिपत्य?


सत्यों मे सबसे बड़ा है 

जीवन - मरण का सत्य।

आया है वो जायेगा ही 

कोई नही अमर्त्य ।