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Sunday, December 26, 2010

एक तेरे जाने से ही दुनिया मेरी वीरान है.


एक तेरे जाने से ही दुनिया मेरी वीरान है.
देख हाल-ए-दिल मेरा हर शख्श ही हैरान है।

कौन है इस बज्म मे मुझको दिलासा दे सके
वैसे तो इस जहाँ में हर शख्श ही परेशान है।

तेरा दिल है बड़ा नाजुक ये पता हमको भी है
रखना संभाल के तेरे दिल में ही मेरी जान है।

महफ़िलों का दौर था पर मै तो प्यासा रह गया
मुझको क्या मालूम था साकी बड़ा बेईमान है।

आज होगा फैसला जीता हूँ या मरता हूँ मैं
आज मेरे घर में मेरा कातिल मेरा मेहमान है।

Saturday, December 11, 2010

रास्ते प्यार के और जीवन-गीत


रास्ते प्यार के
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मोड़ तो आए बहुत पर रास्ते मिलते गए

प्यार के गुलशन में फूल सब खिलते गए

हमसफ़र हो तुम अगर तो सफ़र आसान है

क्या हुआ गर रास्ते में पावं यूँ छिलते गए.

जीवन-गीत
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हार मेरी होती है अगर तो ये तेरी भी हार है

जीत तेरी होती है अगर तो ये मेरी भी जीत है

लय अगर मैं हूँ तेरा तो सुर मेरी बन जाओ तुम

साथ मिलकर गा सकें जो वही जीवन-गीत है.

Thursday, November 11, 2010

रूबाइयां



[ 1 ]

कोई आ जाता है अक्सर मेरे गुमनाम ख्यालों में।
उलझता जाता हूँ फिर मैं उसकी यादों के जालों में।
सौ बार कोशिश कर लिया आ न सका उससे बाहर
जाने क्या सुख मिलता मुझे इन जी के जंजालों में।

[ 2 ]

बंद आखों में बिन बोले चले आते हो तुम।
दिल को मेरे बस यूं ही बहला जाते हो तुम।
सोचता हूँ मैं कि ये कहीं सच तो नहीं है
ख्वाब है ये मुझे धीरे से समझा जाते हो तुम।

( 3 )

जीवन के किसी मोड़ पर गर तुम मिल जाना।
मुमकिन है इस हाल मे  होठों का सिल जाना।
सफ़र पर चलने का भी अपना सुख होता है
जरूरी नही है हर सफर मे मंजिल मिल जाना।

( 4 )

क्या हुआ जो मैं मिट गया तुझे बनाने में।
मेरी तो दुनिया उजड़ गयी तुझे महकाने में।
पर तुम न समझे मेरे प्यार की कीमत क्या है
यूँ तो सदियाँ गुजर गयी तुझे समझाने में।

( 5 )

कोई कितनी लगा दे ताकतें मुझको मिटाने में।
जिंदगी के इस जंग में मुझको हराने में।
मौत भी टकरा के लौट जाएगी मुझसे
गर खुदा ही लग गया कहीं मुझको बचाने में।

Monday, October 18, 2010

रह गयी बस याद बाकी




रह गयी बस याद बाकी
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रह गयी बस याद बाकी, अब न कुछ बाकी रहा.
मयकदा सब सो गया, जागा बस साकी रहा.

जब तुम्हारा साथ था, हम भी बहुत मशहूर थे.
और जब तुम न रहे, सब ख्वाब चकनाचूर थे.

मैंने सब कुछ कह दिया था,क्या तुम्हे कुछ याद है.
मैं यहाँ बर्बाद हूँ, और तू कहाँ आबाद है.

चार दिन की चांदनी थी,अब अँधेरी रात है.
लोग मुझसे पूछते हैं,क्या हुआ क्या बात है?

बोलो अब मैं क्या करूँ,क्या कहूँ,किससे कहूँ.
सहने की एक हद भी है,और मैं कितना सहूँ.

Sunday, October 3, 2010

मैं और तुम.


मैं और तुम.
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मैं मैं था, तुम तुम थे.
क्या कहे उस योग को.
सुखद संयोग को.
मैं और तुम हम हुए.
ख़त्म सारे गम हुए.
जाने पहचाने सफ़र पर.
अनजानी सी डगर पर.
मैं तेरे साथ चला.
तुम मेरे साथ चली.
भावनाओं की ज्वार थी.
मदमस्त बयार थी.
मन में एक डर सा था.
उत्तेजनाओं का बवंडर भी था.
लोग कहते रहे, लोग कहते रहे.
हम चलते रहे, हम चलते रहे.
हुआ वही जिसका हमे डर था.
समाज में एक जंग हुयी.
घरों की शांति भंग हुयी.
समाज के लिए हमे झुकना पड़ा.
साथ चलकर भी हमे रुकना पड़ा.
सारे रिश्ते ख़त्म हुए.
मैं मैं हुआ, तुम तुम हुए.

Thursday, September 23, 2010

ये जीवन है.

मत घबराओ ,
लहरों के थपेरों से।
लहरे तो लहरे हैं ,
आती हैं , जाती हैं ,
उठती हैं , गिरती हैं।
वो नहीं भूलीं 
अपनी प्रकृति को।
तुम भी मत भूलो
संघर्ष की आवृति को।
लहरं हैं अगर 
खूशियों का पैगाम ,
उठो , खुशी मनाओ
गर लहरें हैं ग़मों की ,
तो भी मत घबराओ।
प्रतीक्षा करो ,
उम्मीद के किरण की।
आ जाये किरण ,
फिर उठो , आगे बढ़ो।
यही जीवन है।
जीवन तो मिलन है ,
सुबह और शाम का।
सुख और दुःख का।
अंधेरों और उजालों का।
विपरीत ख्यालों का।
इसी तरह जगती है 
सफलता की आशा।
और पूरी होती है 
जीवन की परिभाषा।

Sunday, September 5, 2010

Ek chahat-Ek tammana-कहाँ हो तुम.

 













कहाँ हो तुम.

मैंने तुमको याद किया है,

ईश्वर से फ़रियाद किया है,

मेरा पूरा विश्व तुम्ही हो,

जीवन का परिदृश्य तुम्ही हो,

मेरा तो संकल्प तुम्ही हो,

जीवन का विकल्प तुम्ही हो,

तुम बिन मैं तो जी न सकूँगा,

खुद के आंसू पी न सकूँगा,

एक बार तुम ध्यान से देखो,

मेरा अपने प्रति प्यार तो देखो,

क्या मुझसे कोई आस नहीं है,

मुझ पर क्या विश्वास नहीं है,

एक बार तो आ जाओ तुम,

मुझसे मिलकर ही जाओ तुम,

अपनी तुमसे क्या कहूं मैं,

तुम ही कहो कितना सहूँ मैं,

मैं खुद से ही जूझ रहा हूँ,

आखिर तुमसे पूछ रहा हूँ,

यदि तुमको आना ही नहीं था,

मुझको यदि पाना ही नहीं था,

स्मृति में मेरे छायी क्यों तुम,

मेरे जीवन में आई क्यों तुम.

एक सहारा मौन का


अपनों के इस जहाँ में

मैं जब भी हुआ अकेला,

तुमने मुझे पुकारा.

जीवन के इस संघर्ष में,

मैं जब भी हुआ निराश,

तुम बन गए सहारा.

जब तिनका भी न मिला ,

मेरे इस डूबते भाग्य को,

तुमने दिया किनारा.

तुम्ही हो मेरे अपने,

कहने को क्या कहें,

कि सारा जहाँ हमारा.

पर एक प्रश्न है,

तुम कौन हो?

तुम मौन हो.

तुम मौन हो.

मेरी.किस्मत



किस्मत की बात करते हो अब क्या बताएं हम,
दिल कांपता है उसके हाव-भाव देखकर।

चलता है,रुकता है,चल-चल के भी रुकता है,
घबराता  हूँ मैं उसके ठौर-ठावं देखकर.।

गम के शहर से भागकर निकला हूँ अकेला,
मिल जायेगा सुकूं खुशी के गावं देखकर।

सब रास्ते हैं बंद अब जाएँ किस तरफ,
थक गया हूँ किस्मत के धूप-छावं देखकर।

लम्बा है सफर जख्म भी मिल सकते हैं मगर
रुकना ना तुम कभी भी अपने पांव देखकर।