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Thursday, June 10, 2021

अजीब दौर है : एक गजल

                   


हर शख़्स के जुबां पर इतना सवाल क्यूं हैं।

इस दौर मे बात बात पर इतना बवाल क्यूं हैं।


किसी को किसी पर भी यकीं क्यों नही रहा 

यहां हर शख्श का अलग ही ख्याल क्यूं है।


जो मिल गया उस पर तो कभी सब्र ना किया

जो मिल न सका उसका इतना मलाल क्यूं है।


इन्सान की गुस्ताखियाँ इस अंजाम तक पहुंची

वर्ना तो इस जहाँ का ये सूरत-ए-हाल क्यूं है


दावा तो करते फिरते हो कि दुश्मनी नही मुझसे

फिर चेहरे का रंग सामने आने पे लाल क्यूं है।

याद , एहसास और प्यार

                    


           ( 1 )

थोड़ा ही मिले तुम पर बहुत कुछ खो गया।

हमे देखे हुए तुमको एक मुद्दत सा हो गया।

यादों मे भी हो आहों मे ख्वाबों मे भी तुम हो

तुम्हे फिक्र ही क्या है किसी को क्या हो गया।

                      ( 2 )

अल्फाज पढ लिया मेरे एहसास न समझे।

दिल के मेरे तुम हो कितना पास न समझे।

सब कह दिया मैने अब है कुछ नही बाकी

मैने तुम्हे समझा है कितना खास न समझे।

                       ( 3 )

मिल जाओ कभी तुम तो मैं तुमको बताऊं।

हाल-ये-दिल अपना कभी मैं तुमको सुनाऊँ। 

तुमसे ये मेरा प्यार कभी भी कम नही होगा

जता चुका हूं सौ बार फिर एक बार जताऊं।

वह तो एक परमशक्ति है।

                     


कौन है जो निर्णय लेता है।

उसके मन से सब चलता है।।

सारे ग्रहों पर उसका वश है।

उसके आगे सब बेबस हैं।।

सारी सृष्टि है वही बनाता।

प्रलय विनाश वही है लाता।।

पंच तत्व से बनी ये काया।

सब कुछ है उसकी ही माया।। 

जीव जन्तु पेड़ या पौधे।

सब मे ही वो जीवन भर दे।।

धूप छांव सब वो करता है।

नदिया सागर वो भरता है।।

देता वही वही सब हरता।

पाप पुण्य की गणना करता।।

किसके साथ कब क्या होना है।

कब जीना है कब मरना है।।

नही किसी को इसका ज्ञान।

दुनिया इन सबसे अंजान।।

पर जो है इन सब का ज्ञाता।

जो भी है सबका निर्माता।।

वह तो एक  परम शक्ति है।

सबकी ही  उसमे भक्ति है।।

दे ना सकूं मैं उसकी आख्या।

कैसे करूं मै उसकी व्याख्या।।

नही है मुझमे इतना ज्ञान।

वो है महान सर्व शक्तिमान।।

जैसा जिसके समझ मे आये।

नतमस्तक वैसा हो जाये।।