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Saturday, September 16, 2023

यादों की बरसात new 6

 यादों की हो रही है बरसात क्या करें।

ढलती ही जा रही है अब रात क्या करें।


गुमसुम पड़ा है चांद चांदनी उदास है

फीकी पड़ी है तारों की बारात क्या करें।


बेवक्त ही आ जाता है यादों का कारवां

दिल को मिला है बस यही सौगात क्या करें।


सिमटी हुई पड़ी थीं सब उलझने मेरी

सब उठ खड़े हुए हैं एक साथ क्या करें।


मुश्किल है हर किसी पर करना यकीं यहां

बिगड़े हुए हैं हर तरफ हालात क्या करें।