ENJOY READING, GO IN DREAMS


Friday, June 24, 2022

अन्तर्मन

बिल्कुल सच है ये कथन।

मन से बड़ा है अन्तर्मन। 

दोनो का चरित्र अलग है।

मन है चंचल और चतुर।

कभी है सहमा कभी डरा।

कभी कभी आक्रोश भरा।

विचलित होता कभी कभी

कभी कभी स्थिर रहता।

कभी कभी उत्साहित सा।

और कभी बस बुझा हुआ।

पर वो जो अन्तर्मन है

मन के अन्दर जो मन है।

कुछ है नही छुपा उससे।

ना सहमा ना डरा हुआ।

सच्चाई से भरा हुआ।

जब कोई ना राह सुझाये।

अन्तर्मन तब राह दिखाये।

जीवन मे जब दुविधा आये

मन जब इधर-उधर बहकाये।

बस इतना ही जानिए

अन्तर्मन फिर जो कह दे

बस उसका ही मानिये।

Tuesday, June 21, 2022

सपनों के गहरे कुएं से

 आशाओं की रस्सी लेकर 

आकांक्षाओं की लिये बाल्टी

चल पड़ता है अक्सर ये मन 

सपनो के किसी कुएं पर।

रंग बिरंगे सपने भर भर 

कुएँ से बाहर निकालता।

फिर धीमे से चुपके चुपके

आंखों मे है मेरी सजाता।

रात पहर जब आंखों के

अन्त:पुर के दरवाजे।

धीमे धीमे बन्द हुए

बिना किये कुछ आवाजें।

मन मेरा ले जाता मुझको

सपनो के एक नये सफर मे।

जो भी उसने चुने हुए हैं।

लिये बाल्टी भरे हुए हैं।

आशाओं की रस्सी ले

सपनो के गहरे कुएं से।