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Wednesday, July 10, 2024

कुछ कहती हैं धड़कनें 40

 यूं ही कभी सांसों के 

वार्तालाप सुन कर देखिए।

क्या कह रही हैं धड़कने 

चुपचाप सुन कर देखिए।


देखने में शांत लेकिन

जाने कितना शोर है।

भावनाओं में उलझती

जा रही कोई डोर है।

दिल के दरवाजे पर 

कोई पद-चाप सुनकर देखिए।

क्या कह रही है धड़कने

चुपचाप सुनकर देखिए।


सांसों की गिनती है निश्चित

बस यूं ही चलती रहे।

इस बहाने जिंदगी की

शाम भी ढलती रहे।

हो समय तो दिल के भी

संताप सुन कर देखिए।

क्या कह रही है धड़कने

चुपचाप सुनकर देखिए।

नाम में क्या रखा है। 39

 नाम में क्या रखा है।

सिर्फ अपने नाम का होकर 

हम आत्म केंद्रित होते हैं।

बहुत सीमित होते हैं।

नाम से बाहर निकलकर 

हम व्यापक होते हैं 

हमारा विस्तार होताहै।

ये अहसास होता है कि 

अपने नाम के अतिरिक्त 

हम कुछ और भी हैं।


                     यथार्थ

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जीवन जीने का अभ्यास।

कल्पनाओं में जीते हुए

यथार्थ समझने का प्रयास।

कभी योजना के अनुसार 

कभी बस यूं ही अनायास

अक्सर होता रहता है 

यथार्थ का आभास।

एक एहसास ऐसा भी 38

 एक समय था जब 

हम बाल कटाने जाते थे

नाई कुर्सी के दोनो हत्थों पर

एक पटरा रख देता था।

उस पर हम बैठते 

फिर नाई बाल काटता था।

यही क्रम चलता रहा

फिर एक दिन उसने कहा

कुर्सी पर ही बैठे रहिए

पटरे की जरूरत नहीं है।

उसी दिन से ये एहसास हुआ

हम भी बड़े हो गए।

अलग बात है। 37

 दर्द में डूब जाना अलग बात है।

दर्द में मुस्कुराना अलग बात है।


वो जो नही आए ये अलग बात है

आ के फिर लौट जाना अलग बात है।


साथ ना दे कोई तो अलग बात है

राह में छोड़ जाना अलग बात है।


ख्वाब आंखों में आना अलग बात है

ख्वाबों का टूट जाना अलग बात है।


ना उठाएं किसी कोआलग बात है

पर उठा कर गिराना अलग बात है।


पलकों में ख्वाब आना अलग बात है

पलकों का भीग जाना अलग बात है।