ENJOY READING, GO IN DREAMS
एक समय था जब
हम बाल कटाने जाते थे
नाई कुर्सी के दोनो हत्थों पर
एक पटरा रख देता था।
उस पर हम बैठते
फिर नाई बाल काटता था।
यही क्रम चलता रहा
फिर एक दिन उसने कहा
कुर्सी पर ही बैठे रहिए
पटरे की जरूरत नहीं है।
उसी दिन से ये एहसास हुआ
हम भी बड़े हो गए।
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