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Saturday, April 9, 2011

ये राजनीति तो गड़बड़झाला है.




















यहाँ बड़ा बड़ा घोटाला है
ये राजनीति तो गड़बड़झाला है
है लूट खसोट की उठा - पटक
कोई यहाँ झटक कोई वहां झटक
है काजल की ये कोठरी
यहाँ दिल भी सबका काला है

..................ये राजनीति तो गड़बड़झाला है.

जो इस चक्कर में फंस ही गया.
कोई उलझ गया कोई सुलझ गया
है ऐसी भूल-भुलैया ये
ये तो मकड़े का जाला है

....................ये राजनीति तो गड़बड़झाला है.

जो देश का रुपया सटक गया
कोई अटक गया कोई पटक गया
सब लूट के कुछ भी न बोले
यहाँ सब के मुंह पर ताला है

....................ये राजनीति तो गड़बड़झाला है.

ये राजनीति का पचड़ा है
यहाँ झगड़ा है यहाँ लफड़ा है
पहले ये कितनी पावन थी
बह रहा यहाँ गन्दा नाला है

....................ये राजनीति तो गड़बड़झाला है.

दूषित है इसका संस्कार
कोई गया पार कोई गया हार
बेईमानी ने इसको जन्म दिया
भ्रस्टाचार ने इसको पाला है

....................ये राजनीति तो गड़बड़झाला है.,