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Saturday, June 26, 2021

कुछ कहा तुमने : एक गजल

           


                    

तुमने कुछ प्यार से कहा मुझको

मिल गयी दर्द की दवा मुझको।


मुस्कराकर जो तुमने देखा है

लग गयी इश्क की हवा मुझको।


तेरे लहराते हुए दामन ने

जैसे चुपके से है छुआ मुझको।


शाम से है उदास दिल मेरा 

तू भी अपनी कुछ सुना मुझको।


प्यार की बात ना करूं तुमसे 

ऐसा कुछ तो नही हुआ मुझको।


तुम मेरे साथ हो तो रहता है

जाने किस बात का गुमां मुझको।


इश्क एक रोग हो गया जैसे 

दे रहे लोग अब दुआ मुझको।

Friday, June 25, 2021

मालिक तो वही है : एक गजल

                       


वो तो मालिक ही जाने उसका उसूल क्या है।

सजा देता है पर बताता नही कि भूल क्या है।


सब नेकियां अपनी मै सूद मे लिखा दूं लेकिन

कर्जदार हूं उसका पता नही कि मूल क्या है।


बेवजह तो इस जहां मे उसने कुछ ना बनाया 

इन्सान क्यों कहे  जरूरी क्या फिजूल क्या है।


खुद के हिस्से के सभी कर्म निभाते जाओ

वो तो कहेगा नही कि उसको कुबूल क्या है।


मंजिल की दिल मे धुन हो और सोच हो सही

फिर राह मे कुछ भी मिले कांटे या फूल क्या है।