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Sunday, December 17, 2023

जाने क्यों , new 12

 मछुवारे सभी यह देख कर हंसने लगे हैं।

कि इंसान भी अब जाल में फंसने लगे हैं।


बस बेवजह ही उसने मुंह फेर लिया है

मेरे अहबाब मुझपे तंज अब कसने लगे हैं।


सापों का जहर शायद अब बेअसर सा है

इंसान ही इंसान को अब डसने लगे हैं।


वो जो अक्सर ही पूछते थे खैरियत मेरी

जाने कौन सी दुनिया में अब बसने लगे हैं।


ख्वाबों के कुछ बीज बोए थे कभी हमने

दिल की दीवारों पर वो अब लसने लगे हैं।

Wednesday, November 8, 2023

आओ मिलकर बात करें 11

 आओ मिलकर बात करें।

आंखों से बरसात करें।


हंसकर सह लें सारे गम 

मुश्किल क्यों हालात करें।


ख्वाब बहुत हैं आंखो मे

दिन को भी अब रात करें।


खुशियों के पल गिनती के

कैद में वो लम्हात करें।


मंजिल मिल ही जाएगी

चलने की शुरुआत करें।

Monday, October 2, 2023

समांतर रेखाएं 9

 खामोशियां, उदासियां 

तुम और तुम्हारी यादें 

भावनाएं, संवेदनाएं

मेरे गीत मेरी कविताएं 

ये सब हैं मेरे जीवन की

समानांतर रेखाएं।

प्रारंभ से अनंत तक

चलती हैं साथ साथ। 

जाता हूं जिधर भी मैं

रहती हैं साथ साथ।

ऐसा नहीं कि इन सबसे

बिल्कुल अनदेखा हूं मैं 

इन्ही के साथ चलती 

एक समानांतर रेखा हूं मैं।

मैं प्रसंग हूं। 8

 किसी ने पूछा 

शब्द लिखते हो ,

अर्थ लिखते हो, 

लेकिन इनमें 

तुम क्या हो ?

तुम कहां हो ?

मैने कहा उनसे

शब्द केवल 

शब्द नहीं हैं।

अर्थ केवल 

अर्थ नही हैं।

अनुभूतियों की,

भावनाओं की,

संवेदनाओं की,

सम्पूर्ण आख्या हैं

विस्तृत व्याख्या हैं।

मैं उस व्याख्या का 

एक अभिन्न अंग हूं 

मैं ही प्रसंग हूं।

Friday, September 22, 2023

बस वही कहना शेष है। 7

संभव जो भी था कहना 

वो है सब कह दिया।

जो नही कह सका

बस वही कहना शेष है।


अश्क जो भी आंखों से

बह सके वो बह गए।

जो नही बह सके

बस उन्हें बहना शेष है।


दर्द जो भी सह सके 

वो सब हैं सह गए।

जो नही सह सके

बस उन्हें सहना शेष है।


दिलों के बीच जो भी थे

सब दीवार ढह गए।

जो हैं रह गए अब तक

बस उन्हें ढहना शेष है।

Saturday, September 16, 2023

यादों की बरसात new 6

 यादों की हो रही है बरसात क्या करें।

ढलती ही जा रही है अब रात क्या करें।


गुमसुम पड़ा है चांद चांदनी उदास है

फीकी पड़ी है तारों की बारात क्या करें।


बेवक्त ही आ जाता है यादों का कारवां

दिल को मिला है बस यही सौगात क्या करें।


सिमटी हुई पड़ी थीं सब उलझने मेरी

सब उठ खड़े हुए हैं एक साथ क्या करें।


मुश्किल है हर किसी पर करना यकीं यहां

बिगड़े हुए हैं हर तरफ हालात क्या करें।

Friday, August 25, 2023

हथेली में चांद, new 5

हम नही जायेंगे चांद पर

उतार लेंगे चांद को ही,

अपनी कविताओं में,

कभी अपने छत पर

कभी बालकनी में।

उलझा देंगे चांद को,

पेड़ों की टहनियों में

पत्तियों या डालियों में।

मुट्ठी में लेकर चांद को

या अपनी हथेली में

दे देंगे किसी को यूं ही

कभी किसी उपहार में

या किसी को प्यार में।

और वो इस व्यवहार को

काल्पनिक उपहार को

कर लेगा स्वीकार भी। 

अनंत परिभाषाएं प्रेम की

और एक ये भी सही।

Saturday, August 19, 2023

तुम , new 4

सागर की गहराई में तुम

पर्वत की ऊंचाई में तुम।

प्रश्नों और जवाबों में तुम

आते जाते ख्वाबों में तुम।

पुष्पों और लताओं में तुम

मेरी हर कविताओं में तुम।

सांसों में तुम यादों में तुम

सुबह शाम फरियादों में तुम।

झिलमिलाती लड़ियों में तुम

फूलों की पंखुड़ियों में तुम।

अंधेरों और उजालों में तुम 

ख्वाबों और ख्यालों में तुम।

मेरे दिल की बातों में तुम

और चांदनी रातों में तुम।

हर बंधन हर फेरों में तुम

मेरी गजल के शेरों में तुम।

हर रास्ते हर राहों में तुम।

मंजिल और पनाहों में तुम।

आशा और निराशा में तुम

रिश्तों की परिभाषा में तुम।

प्रश्न है किन रिश्तों में तुम

दुनिया के हर रिश्तों में तुम।

Sunday, August 13, 2023

स्मृतियों के आयाम New 3

डालियां जब झूमती हों एक लय में।

सूर्य भी संकोच करता हो उदय में।

रूप यादों का लिए संग धड़कनों के

आ ही जाता है कोई मेरे हृदय में।


पुष्प आशाओं के तमाम लेकर।

स्मृतियों के नए आयाम लेकर।

भेज यादों को स्वप्नों के विलय में।

आ ही जाता है कोई मेरे हृदय में।


स्वप्न यदि तुम आए हो तो यूं न टूटो।

साथ दो कुछ और पल यूं न छूटो।

देख मन को इस अनुनय -विनय में

आ ही जाता है कोई मेरे हृदय में।

वाइज की ये बातें हैं। New 2

 वो लोग जिनके हिस्से में गम नही आते।

अफसोस ऐसे लोगों में हम नही आते।


आंखों से भला अश्कों का हिसाब क्या करें।

ज्यादा ही चले आते है क्यों कम नहीं आते।


चलना ही पड़ता है हमे मंजिल की राह में

खुद अपने आप राह में कदम नही आते।


रिश्तों का बिगड़ना तो मुमकिन ही नही था

गर बेवजह ही दरमियाँ वहम नही आते।


वाइज़ से पूछता हूं मयकदे का रास्ता

जिस रास्ते में दैर-ओ-हरम नही आते।

जिस रास्ते में दैर-ओ-हरम नही आते।

आया है यहां कौन ठहरने के वास्ते New -1

आया है यहां कौन ठहरने के वास्ते।

जीते ही जा रहे हैं मरने के वास्ते।


मोहलत जरा सी दे दे ये जिंदगी हमे

कुछ काम हैं बचे अभी करने के वास्ते।


सूरज की रोशनी तो निकलती है झूम के 

बस खुल के आसमां में बिखरने के वास्ते।


वादों पे कभी यूं ही एतबार ना करें

अक्सर तो ये होते हैं मुकरने के वास्ते।


मेहनत भी जरूरी है दुवाओं के अलावा

किस्मत की लकीरों को संवरने के वास्ते।

किस्मत की लकीरों को संवरने के वास्ते।

Tuesday, July 4, 2023

प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान

 प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान

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आज हम यहां प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान के बारे में बात करेंगे और जानेंगे कि इसका मतलब क्या है , इसका उद्देश्य क्या है , किन लोगों को इसका लाभ मिल सकेगा , क्या लाभ मिल सकेगा और भी बहुत सी बातें करेंगे इसके बारे में लेकिन इसकी पूरी जानकारी लेने के पहले यह जानना बहुत आवश्यक है कि डिजिटल साक्षरता क्या है। किन लोगों को कहा जाएगा कि वो डिजिटल साक्षर हैं या नहीं हैं।

    ऐसे सभी लोगों को चाहे वो ग्रामीण क्षेत्र को हों या शहरी क्षेत्र के हों, जिन्हे कंप्यूटर, स्मार्ट फोन , टेबलेट जैसे उपकरणों  और उनके संचालन का ज्ञान नहीं है , जिन्हे इंटरनेट की उपयोगिता और उसके संचालन का ज्ञान नहीं है , जिसके कारण वे बहुत सी सरकारी और गैर सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पाते हैं उन्हें कहा जाता है कि वो लोग डिजिटल साक्षर नही हैं। जिन लोगों को ये सब जानकारी है उन्हे डिजिटल साक्षर कहा जाता है।

       हमारे देश में अधिकांश ग्रामीण आबादी संसाधनों की कमी के कारण या किसी व्यक्तिगत या पारिवारिक समस्याओं के कारण डिजिटल रूप से साक्षर नहीं हो पाते। इस कारण वे बहुत सी सरकारी सेवाओं और योजनाओं को नही जान पाते है और उसका लाभ नहीं उठा पाते हैं। इंटरनेट की जानकारी ना होने के कारण वो और भी बहुत सी सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पाते जो ऑनलाइन उपलब्ध हैं। सन 2014 के एक सरकारी सर्वे से पता लगा कि केवल 6 प्रतिशत ग्रामीण आबादी ही डिजिटल रूप से साक्षर है।

         इसी को ध्यान में रखकर फरवरी 2017 में हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने एक योजना की शुरुआत की जिसे हम प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान के नाम से जानते हैं। ये प्रधानमंत्री जी की एक बहुत ही महात्वाकांक्षी योजना है। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र के उन लोगों को जो डिजिटल रूप से साक्षर नही हैं , मतलब जिन्हे कंप्यूटर , स्मार्ट फोन  , टेबलेट या इंटरनेट इन सब चीजों की जानकारी नहीं है उन्हे इन सब के बारे में एक निशुल्क प्रशिक्षण ( training ) देकर उन्हें डिजिटल साक्षर बनाया जाएगा जिससे वो लोग कंप्यूटर , स्मार्ट फोन और इंटरनेट का उपयोग करना सीख लें और ऑनलाइन सुविधाओं और सेवाओं का लाभ उठा सकें।

लाभ

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1. इस योजना से ग्रामीण जनता को डिजिटल उपकरणों जैसे कंप्यूटर , स्मार्ट फोन टेबलेट आदि के बारे में जानकारी दी जाएगी साथ ही साथ इन उपकरणों को किस प्रकार उपयोग करना है इस बात की जानकारी भी दी जाएगी।


2. इस प्रशिक्षण में इंटरनेट का संचालन , इंटरनेट की उपयोगिता की जानकारी भी दी जाएगी।


3. लोगों को ऑनलाइन और डिजिटल प्लेटफार्मों की जानकारी दी जाएगी जिससे वो internet के द्वारा अपने दैनिक जीवन में स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य सुविधाओं का लाभ उठा सकें।


4.इस प्रशिक्षण में उन्हें ऑनलाइन पैसा भेजना और बैंक से जुड़ी अन्य सुविधाओं का लाभ उठाना सिखाया जाएगा।


5. और भी बहुत सी सेवाओं , ऑनलाइन बुकिंग आदि की जानकारी भी दी जाएगी।

पात्रता 

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1. इस योजना का लाभ ग्रामीण क्षेत्र के उन परिवारों को मिलेगा जिनके परिवार में कोई भी सदस्य डिजिटल रूप से साक्षर नही है। मतलब परिवार के किसी भी सदस्य को कंप्यूटर , स्मार्ट फोन , टेबलेट , इंटरनेट  इन सब चीजों की जानकारी नहीं है।


2.. प्रत्येक परिवार के केवल एक सदस्य को ही प्रशिक्षित किया जाएगा। यहां परिवार का मतलब घर का मुखिया , उसकी पत्नी , उसके बच्चे और उसके माता पिता से है।


3. इस योजना के अंतर्गत कक्षा 9 से कक्षा 12 तक पढ़ने वाले छात्र जिनके विद्यालय में स्मार्ट क्लास या कंप्यूटर उपलब्ध नहीं है उन्हे भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।


4. आवेदक को भारत का निवासी होना चाहिए और उसकी उम्र 14 वर्ष से 60 वर्ष के बीच में होनी चाहिए।


5. वैसे तो यह योजना सभी के लिए है फिर भी अनुसूचित जाति , जन जाति , महिलाओं  और दिव्यांगो को तथा गरीबी रेखा के नीचे  ( BPL ) आने वाले परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी।


6. परिवारों का चुनाव जिला प्रशासन , ग्राम पंचायत और ब्लॉक डेवलपमेंट के अधिकारी मिलकर करेंगे ताकि इस योजना का लाभ सिर्फ उन लोगों को मिल सके जो सही मायनो में इसके हकदार हैं।


पंजीकरण प्रक्रिया ( Registration ) प्रक्रिया और ट्रेनिंग 

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जो लोग इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं वो अपने नजदीकी CSC ( common service centre ) / जन सेवा केंद्र जाकर अपना पंजीकरण ( Registration) करवा सकते हैं। पंजीकरण होने के बाद उसी जन सेवा केंद्र से ही आपको प्रशिक्षण के बारे में पूरी जानकारी मिल जाएगी। अगर वही जनसेवा केंद्र जहां आपने पंजीकरण करवाया है ट्रेनिंग सेंटर के रूप में रजिस्टर्ड है तो  आपकी ट्रेनिंग वहीं हो जाएगी वरना किसी दूसरे नजदीकी प्रशिक्षण केंद्र में आपकी ट्रेनिंग हो जायेगी।

पूरा प्रशिक्षण कुल 20 घंटे का होता है जिसे 10 दिनों में पूरा करना होता है।

           प्रशिक्षण पूरा होने के बाद जिन लोगों ने भी प्रशिक्षण लिया है उन्हे एक ऑनलाइन परीक्षा देनी होती है। परीक्षा पास करने के बाद एक डिजिटल प्रमाण पत्र भी दिया जाता है जो उनके डिजिटल साक्षर होने का प्रमाण होता है।

           यह परीक्षा कोई बहुत कठिन परीक्षा नही होती है , बहुत ही सरल होती है और उसे पास करना बहुत ही आसान होता है। पूछे गए 25 प्रश्नों में अगर 7 प्रश्नों के उत्तर भी सही हैं तो उन्हें पास मान लिया जाता है। परीक्षा के लिए कहीं और नहीं जाना होता है , जहां प्रशिक्षण दिया जाता है परीक्षा भी वहीं हो जाती है।


पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज 

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1. आधार कार्ड    2. पहचान पत्र    3. पासपोर्ट साइज का फोटो  4. मोबाइल नंबर 



पंजीकरण से लेकर प्रशिक्षण ( training ) तक की पूरी प्रक्रिया के बारे में अगर किसी को यदि कोई दुविधा या शंका हो तो उसके लिए सरकार ने एक हेल्प डेस्क बनाया है जिस पर फोन करके या ईमेल करके अपनी दुविधा या शंका को दूर किया जा सकता है।

      फोन - 180030003468 

      मेल  - helpdesk@pmdisha.in 

तो फिर देर किस बात की है। जितनी भी जल्दी संभव हो सके अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र ( CSC ) जाकर अपना पंजीकरण कराइए और सरकार के इस महात्वाकांक्षी योजना का लाभ उठाइए। अपने देश को डिजिटल इंडिया बनने में अपना सहयोग दीजिए।

Monday, May 29, 2023

झंझावात

 झन्झावात भरी दुनिया मे 

जीवन भर कौन जीता है।

अपना दर्द भुलाकर यहां 

औरों के जख्म कौन सीता है।

मानवता का पतन हो रहा

इस झूठेपन की दुनिया मे 

झूठ का ही बोलबाला है 

सच का जहर कौन पीता है।

मैं हूं बस सारथी

 युद्ध नहीं लड़ना मुझको

ना मैं कोई महारथी।

मन मेरा एक रथ समान

जिस पर सवार हैं शब्द मेरे।

शब्द मेरे यात्रा पर हैं;

मैं शब्दों का सारथी।

युद्ध नहीं लड़ना मुझको

ना मैं कोई महारथी।

छोटू बाबू हुए बड़े

 छोटू बाबू हुए बड़े।

चल लेते हैं खड़े खड़े।

पहिए वाले घोड़े पर 

घूम रहे हैं चढ़े चढ़े।

दिन भर करते शैतानी 

कुच्छू नाही पढ़े पढ़े।

चाहे वो कुछ भी बोलें

रहते उस पर अड़े अड़े।

छोटी छोटी बातों पर 

रहते सबसे लड़े लड़े।

मम्मी ने डांटा उनको

आज सबेरे कड़े कड़े। 

देख के मम्मी का गुस्सा

सिसक रहे हैं पड़े पड़े।

मम्मी अब पुचकार रहीं

देख के आंसू घड़े घड़े।

रुक जाओ ना

 रह जाए ना तेरी मेरी प्रीत अधूरी।

रुक जाओ तुम सुन लो मेरी बातें पूरी।

राह ताकता रहता हूं हर बार तुम्हारा।

स्वप्नों पर भी अब तो है अधिकार तुम्हारा।

मध्य दिलों के रखो ना इतनी भी दूरी।

रह जाए ना तेरी मेरी प्रीत अधूरी।

आज की महिला

 किस्मत में बस यही लिखा था 

कुछ मत बोलो सिर्फ सुनो।

करना कुछ भी नही है तुमको

मन ही मन बस ख्वाब बुनो।


आज की नारी है सशक्त

उसने सब कुछ है बदल दिया।

सारे भ्रम को तोड़ के उसने

खुद को अब है सबल किया।


खुद पर कर विश्वास किया है

पूरा अपने ख्वाबों को।

दुनिया देख रही है उनके

प्रश्नों और जवाबों को।

Saturday, May 27, 2023

बिना प्रश्न का प्रश्न-चिन्ह

मन के मन में क्या रहता है

मन ये कभी नही कहता।

पर मन के भीतर दिखता है

बिना प्रश्न एक प्रश्न-चिन्ह

कोई प्रश्न नही है फिर भी

उत्तर की अभिलाषा है

समझ सको तो समझ लो

मेरे अंतर्मन का वो प्रश्न-चिन्ह।

सार नही विस्तार हो तुम।

 प्रेम एक कल्पना भी है 

और उसका आसार हो तुम।

अक्सर आने वाले स्वप्नों का 

एक मात्र साकार हो तुम।

वो अमर शब्द ढाई अक्षर का

जिसका कोई अन्त नही

प्रेम के उस अदभुत रचना का

सार नही विस्तार हो तुम।

ऐसा नहीं कि ....

 सुनते नही हो तुम मुझे ये और बात है

ऐसा नहीं कि तुमसे कुछ कहता नही हूं मैं।

आंखों से एक सागर है बहता कभी कभी

ऐसा नहीं कि उसमे कुछ बहता नही हूं मैं।

जिस राह पे आंखों को एक ख्वाब था मिला

ऐसा नहीं कि उस राह गुजरता नही हूं मैं।

आंखों को है शिकवा कि ख्वाब टूटते हैं क्यूं

ऐसा नहीं कि इस बात से डरता नहीं हूं मैं।ai

बातें जमीर की

जरा ध्यान से तो देखिए अपने जमीर में।

खुद को छिपाए रखे हैं हम अपने शरीर में।


हर हाल में खुश रहने का क्या राज है यहां

आओ करें तलाश एक सच्चे फकीर में।


कमजोर छत टिकेगी कब तक दीवारों पर 

दीमक जब लग गए हों उसके शहतीर में।


इक दौलत-ए-ईमान का सौदा ना कीजिए

मिलती नही ये चीज किसी जागीर में।


किस्मत की लकीरें सब उलझी सी पड़ी हैं

ना जाने तुम मिलोगे कहां किस लकीर में।

सपनों का विस्तार

 थोड़ा चलना थोड़ा रुकना।

गिरना उठना और संभलना।

यूं ही थोड़ा थोड़ा चलकर 

अपने मंजिल पर पहुंचना।

सपनों का विस्तार हमारा

आसमान के जैसा हो।

अपना सफर बस ऐसा हो।


सागर जैसा गहरा होना।

आसमान सा ऊंचा उड़ना।

लहरों के मानिंद उछलकर

वापस फिर से बहते रहना।

जीवन का उत्साह हमारा

बहते लहरों जैसा हो।

अपना सफर बस ऐसा हो।

बात वाजिब तो है।

 तराजू झूठ का लेकरके उसमे सच को तौलना।

बात वाजिब तो नही है मुसलसल झूठ बोलना।


जिक्र खुद का करें कैसे जिन्हे ये शौक रहता है

छुपाकर राज सब अपने सभी के राज खोलना।


बात ऐसी न कोई कीजिए कि दिल को जो चुभे 

अब जरूरी है लफ्जों में अपने शहद घोलना।


जिस बात पर खुद अपने ही दिल की रजा न हो

फिर क्या है किसी और के दिल को टटोलना।


झूठों को सुखी देखकर राह सच का बदल दें 

लोग कहते हैं सब इसको ही नीयत का डोलना।

Saturday, April 15, 2023

अपूर्ण

 कागज़ के एक पन्ने पर 

तुम्हारे नाम के नीचे लिखे 

इधर उधर बेतरतीब से 

कुछ बिखरे हुए शब्द ,

कुछ अपूर्ण वाक्य। 

साक्षी हैं इस बात के 

कि कुछ तो लिख गया। 

कुछ लिखने से रह गया।


अदृश्य भावनाएं

 कभी कभी

दो चार शब्द भी 

सिर्फ शब्द नही होते।

उनमें छिपी होती है

संवेदनाओं से सजी, 

भावनाओं से परिपूर्ण,

एक संपूर्ण किताब।

शब्दों को पढ़ने से 

समझ में आते हैं

सिर्फ उनके अर्थ।

शब्दों और अर्थों के 

अप्रत्याशित द्वंद में,

अछूती रह जाती हैं

शब्दों में समाहित 

असीमित और 

अपरिभाषित

निर्दोष भावनाएं।

प्रार्थना गीत

 हे परमेश्वर, मेरे ईश्वर 

तुम्ही हो, तुम्ही हो, तुम्ही हो कर्णधार

हे परमेश्वर -------

नतमस्तक हैं तुम पर तो हम 

तुम्ही हो, तुम्ही हो, तुम्ही हो पालनहार 

हे परमेश्वर ---- 


हम तो कुछ भी नही तेरी, चरणों के धूल हैं।

तुमको अर्पित करते हम, श्रद्धा के फूल हैं।

दया करो तुम, कष्ट हरो तुम 

हम पर कृपा करो तुम।

हे परमेश्वर -------

तुम्ही हो, तुम्ही हो,तुम्ही हो पालनहार 

हे परमेश्वर ------


जीवन की राह कठिन है, हर पल तुम साथ रहना 

जब भी हम भूलें भटकें, तुम सर पे हाथ रखना।

तुम ही हो बस एक सहारा 

तुम ही एक किनारा  

हे परमेश्वर ----

तुम्ही हो, तुम्ही हो, तुम्ही हो कर्णधार 

हे परमेश्वर ----


अपने कर्तव्य मार्ग पर, हरदम चलते रहें हम।

ऐसा वरदान हमें दो, आगे बढ़ते रहे हैं हम।

ध्यान तुम्हारा सदा करें हम

तुमको नमन करें हम

हे परमेश्वर ------

तुम्ही हो, तुम्ही हो, तुम्ही हो पालनहार 


हे परमेश्वर, मेरे ईश्वर 

तुम्ही हो, तुम्ही हो, तुम्ही हो कर्णधार 

हे परमेश्वर -------

कटाक्ष

 चूहे पड़े हैं सुस्त सब शातिर हैं बिल्लियां।

दुनिया उड़ाएगी ही चूहों की खिल्लियां।


कितने हों खूबसूरत दरवाजे काठ के

निगरानी तो करेंगी ताले व किल्लियां।


एक टूटी झोपड़ी में रहता है चैन से 

जो रोज तोड़ता है पत्थर की सिल्लियां।


ऐसे ही रह जाएगा बदहाल इंतजाम 

जब कुर्सियों पे होंगे सब शेखचिल्लियां।


सब रंग ज़माने का दिखेगा साफ साफ

आंखों से हटा दीजिए परदे व झिल्लियां।

दिन बदलने लगे

 जैसे जैसे ये दिन सब गुजरने लगे।

बीते हुए दिन भी अच्छे लगने लगे।


राहों के पत्थरों ने ये काम कर दिया

खा के ठोकर सभी अब संभलने लगे।


दुवाएं दोस्तों की हैं लग रहीं शायद 

दिन अपने भी अब हैं बदलने लगे।


धीमे धीमे ही सही बात पहुंची यहां 

बात दिल की मेरे वो समझने लगे।


दिल में आए भी वो फिर चले भी गए

मानिंद तिनकों के हम बस बिखरने लगे।