तराजू झूठ का लेकरके उसमे सच को तौलना।
बात वाजिब तो नही है मुसलसल झूठ बोलना।
जिक्र खुद का करें कैसे जिन्हे ये शौक रहता है
छुपाकर राज सब अपने सभी के राज खोलना।
बात ऐसी न कोई कीजिए कि दिल को जो चुभे
अब जरूरी है लफ्जों में अपने शहद घोलना।
जिस बात पर खुद अपने ही दिल की रजा न हो
फिर क्या है किसी और के दिल को टटोलना।
झूठों को सुखी देखकर राह सच का बदल दें
लोग कहते हैं सब इसको ही नीयत का डोलना।
No comments:
Post a Comment