थोड़ा चलना थोड़ा रुकना।
गिरना उठना और संभलना।
यूं ही थोड़ा थोड़ा चलकर
अपने मंजिल पर पहुंचना।
सपनों का विस्तार हमारा
आसमान के जैसा हो।
अपना सफर बस ऐसा हो।
सागर जैसा गहरा होना।
आसमान सा ऊंचा उड़ना।
लहरों के मानिंद उछलकर
वापस फिर से बहते रहना।
जीवन का उत्साह हमारा
बहते लहरों जैसा हो।
अपना सफर बस ऐसा हो।
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