ENJOY READING, GO IN DREAMS
प्रेम एक कल्पना भी है
और उसका आसार हो तुम।
अक्सर आने वाले स्वप्नों का
एक मात्र साकार हो तुम।
वो अमर शब्द ढाई अक्षर का
जिसका कोई अन्त नही
प्रेम के उस अदभुत रचना का
सार नही विस्तार हो तुम।
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