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Saturday, May 27, 2023

सार नही विस्तार हो तुम।

 प्रेम एक कल्पना भी है 

और उसका आसार हो तुम।

अक्सर आने वाले स्वप्नों का 

एक मात्र साकार हो तुम।

वो अमर शब्द ढाई अक्षर का

जिसका कोई अन्त नही

प्रेम के उस अदभुत रचना का

सार नही विस्तार हो तुम।

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