नाम की चर्चा तुम्हारे आज हर महफिल मे है।
क्या करे क्या ना करे दिल बड़ी मुश्किल मे है।
तुम जो बोलोगे नही तो कैसे जानू मैं भला
दिल हमारा इश्क मे अब कौन सी मंजिल मे है।
उलझनो के दौर से बाहर निकलना है मुझे
चाहिये अब वो सुकूं जो बस दिल-ए-गाफिल मे है।
बच निकल आया हूं अब मैं जो भला तूफान से
ऊंचे लहरों की तमन्ना फिर से अब साहिल मे है।
आज उस रब ने दिख्याया ये करिश्मा ख्वाब मे
जान मेरी अब तो शायद मेरे ही कातिल मे है।