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Thursday, April 3, 2025
साहिल से बात करते हैं 57
भोग वाली मिठाई। 56
सुबह पूजा में भगवान को
मीठे का भोग लगाती मां।
फिर कुछ समय बाद ही
आधी मिठाई गायब हो जाती
बस आधी ही बची रहती।
बच्चा रोज पूछता मां से
ये आधी मिठाई कहां जाती है
कौन खा लेता है चोरी से।
मां बस इतना कहती कि
आधी भगवान खा जाते है।
आधी तुम्हारे लिए छोड़ जाते है।
बच्चा मान भी जाता।
समय का क्रम चलता रहा
एक दिन बच्चे के पिता जी नहीं रहे।
दूसरे दिन बच्चे ने देखा कि
दान वाली पोटली में सामान के साथ
एक पैकेट मिठाई भी थी।
बच्चे ने पूछा मां ये मिठाई क्यों?
मां ने कहा कि तेरे पिता जी को
मीठा खाना बहुत पसंद था।
उस दिन बच्चे को समझ में आया
वो भोग वाली आधी मिठाई
कहां गायब हो जाती थी।
एहतराम रखते हैं। 55
हम उनका भी बड़ा एहतराम रखते हैं।
एक चेहरे पे जो चेहरे तमाम रखते हैं।
दर्द गैरों का भी जो अपना समझते लेते हैं।
सारी दुनिया में वो ऊंचा मक़ाम रखते हैं।
पल भर में क्या होगा किसको पता यहां
और ज़माने का हम इंतज़ाम रखते हैं।
सादगी का अपना रुतबा ही अलग है
क्यों भला फिर लोग ताम-झाम रखते है।
है खता मेरी तो गुनाहगार हम ही हैं।
हम ना किसी पर कोई इल्जाम रखते हैं।