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Thursday, September 23, 2010

ये जीवन है.

मत घबराओ ,
लहरों के थपेरों से।
लहरे तो लहरे हैं ,
आती हैं , जाती हैं ,
उठती हैं , गिरती हैं।
वो नहीं भूलीं 
अपनी प्रकृति को।
तुम भी मत भूलो
संघर्ष की आवृति को।
लहरं हैं अगर 
खूशियों का पैगाम ,
उठो , खुशी मनाओ
गर लहरें हैं ग़मों की ,
तो भी मत घबराओ।
प्रतीक्षा करो ,
उम्मीद के किरण की।
आ जाये किरण ,
फिर उठो , आगे बढ़ो।
यही जीवन है।
जीवन तो मिलन है ,
सुबह और शाम का।
सुख और दुःख का।
अंधेरों और उजालों का।
विपरीत ख्यालों का।
इसी तरह जगती है 
सफलता की आशा।
और पूरी होती है 
जीवन की परिभाषा।