ERASER TOLD TO PENCIL.............,
क्या हुआ जो मैं मिट गया तुझे बनाने में
मेरी तो दुनिया उजड़ गयी तुझे महकाने में
पर तुम न समझे मेरे प्यार की कीमत क्या है
यूँ तो सदियाँ गुजर गयीं तुझे समझाने में ,
PENCIL REPLIED TO ERASER............,
मैं तो कोरे कागज़ से प्यार करती हूँ.
उसी के जीवन में हमेशा से रंग भरती हूँ.
मैंने तुमसे कहा था मेरे जीवन में कोई और है
पर तू भी मुआ बड़ा जलनखोर है.
मैं जब भी कोरे कागज़ से प्यार करती हूँ
उसके चौड़े सीने पर प्यार से मचलती हूँ.
तू आकर उस प्यार को मिटा देता है.
क्या यही है तेरा प्यार इसी का सिला देता है.,