एक वृत्त मे रहकर
कोई त्रिज्या बनेंगे
या कोई जीवा बनेंगे।
अधिकतम बने तो
कोई व्यास बनेंगे।
या चलेंगे वृत्त पर
परिधि के बराबर
तो पहुंचेगे फिर वहीं
जहां आकर मिलता है
अन्त प्रारंभ से।
बनना है व्यास से बड़ा
पहुंचना है वहां जहा
अन्त अलग है प्रारम्भ से
तो फिर निकलना होगा
वृत्त से बाहर,
एक नये पृष्ठ तल पर
जिसका विस्तार है
अनंत और असीम।