मन के मन में क्या रहता है
मन ये कभी नही कहता।
पर मन के भीतर दिखता है
बिना प्रश्न एक प्रश्न-चिन्ह
कोई प्रश्न नही है फिर भी
उत्तर की अभिलाषा है
समझ सको तो समझ लो
मेरे अंतर्मन का वो प्रश्न-चिन्ह।
ENJOY READING, GO IN DREAMS
मन के मन में क्या रहता है
मन ये कभी नही कहता।
पर मन के भीतर दिखता है
बिना प्रश्न एक प्रश्न-चिन्ह
कोई प्रश्न नही है फिर भी
उत्तर की अभिलाषा है
समझ सको तो समझ लो
मेरे अंतर्मन का वो प्रश्न-चिन्ह।
प्रेम एक कल्पना भी है
और उसका आसार हो तुम।
अक्सर आने वाले स्वप्नों का
एक मात्र साकार हो तुम।
वो अमर शब्द ढाई अक्षर का
जिसका कोई अन्त नही
प्रेम के उस अदभुत रचना का
सार नही विस्तार हो तुम।
सुनते नही हो तुम मुझे ये और बात है
ऐसा नहीं कि तुमसे कुछ कहता नही हूं मैं।
आंखों से एक सागर है बहता कभी कभी
ऐसा नहीं कि उसमे कुछ बहता नही हूं मैं।
जिस राह पे आंखों को एक ख्वाब था मिला
ऐसा नहीं कि उस राह गुजरता नही हूं मैं।
आंखों को है शिकवा कि ख्वाब टूटते हैं क्यूं
ऐसा नहीं कि इस बात से डरता नहीं हूं मैं।ai
जरा ध्यान से तो देखिए अपने जमीर में।
खुद को छिपाए रखे हैं हम अपने शरीर में।
हर हाल में खुश रहने का क्या राज है यहां
आओ करें तलाश एक सच्चे फकीर में।
कमजोर छत टिकेगी कब तक दीवारों पर
दीमक जब लग गए हों उसके शहतीर में।
इक दौलत-ए-ईमान का सौदा ना कीजिए
मिलती नही ये चीज किसी जागीर में।
किस्मत की लकीरें सब उलझी सी पड़ी हैं
ना जाने तुम मिलोगे कहां किस लकीर में।
थोड़ा चलना थोड़ा रुकना।
गिरना उठना और संभलना।
यूं ही थोड़ा थोड़ा चलकर
अपने मंजिल पर पहुंचना।
सपनों का विस्तार हमारा
आसमान के जैसा हो।
अपना सफर बस ऐसा हो।
सागर जैसा गहरा होना।
आसमान सा ऊंचा उड़ना।
लहरों के मानिंद उछलकर
वापस फिर से बहते रहना।
जीवन का उत्साह हमारा
बहते लहरों जैसा हो।
अपना सफर बस ऐसा हो।
तराजू झूठ का लेकरके उसमे सच को तौलना।
बात वाजिब तो नही है मुसलसल झूठ बोलना।
जिक्र खुद का करें कैसे जिन्हे ये शौक रहता है
छुपाकर राज सब अपने सभी के राज खोलना।
बात ऐसी न कोई कीजिए कि दिल को जो चुभे
अब जरूरी है लफ्जों में अपने शहद घोलना।
जिस बात पर खुद अपने ही दिल की रजा न हो
फिर क्या है किसी और के दिल को टटोलना।
झूठों को सुखी देखकर राह सच का बदल दें
लोग कहते हैं सब इसको ही नीयत का डोलना।