ENJOY READING, GO IN DREAMS


Saturday, June 11, 2022

सच ही तो है।

 जवाब से बड़ा जब सवाल होता है।

वो भी इक तरह का बवाल होता है।


चाह कर भी कोई कुछ कर न पाये तो

यकीन मानिये बड़ा मलाल होता है।


गिरते को उठाना फिर उसे ही गिराना

ये भी सियासत का एक चाल होता है।


गर जिन्दगी मे चैन-ओ-सुकून ही न हो

फिर इस हाल मे जीना मुहाल होता है।


गर्दिशों से लड़ कर बुलंदी पे जो पहुंचा

वही फिर जमाने मे एक मिसाल होता है।

Tuesday, June 7, 2022

दीवाल पर टंगी आंखें

 कमरे मे दो आंखें

जब देखता हूं उन्हे ,

वो भी देखती हैं मुझे।

जिस तरफ भी घूमूं मैं

वो भी घूम जाती हैं ,

बस उस तरफ ही।

मैं उन्हे देखूं तो 

वो भी मुझे देखती हैं।

कोई और उन्हे देखे

तो वो उन्हे देखती हैं।

जो भी देखे उन्हे

बस उन्हे देखती हैं।

कुछ बोलती नही ,

कुछ कहती नही ,

एक टक निहारती 

भ्रमित करती ,

दीवाल पर टंगी

दो स्थिर आंखें।

Monday, June 6, 2022

तुम

 इक बार तुम्हे कोई सुन ले 

फिर तुमको वो कैसे भूले

सब सात सुरों से सजी हुई

एक स्वर लहरी जैसी हो तुम।

इक बार तुम्हे कोई पढ़ ले

फिर तुमको वो हर पल ढूढे

कल्पना लोक मे सजी हुई

एक परी कथा जैसी हो तुम।

इक बार तुम्हे कोई देखे

हर कली लगे मुरझाई सी

फूलों के गुलशन मे जैसे 

पुष्प एक खिली हो तुम।