बचपन में
बारिश से बचने के लिए
पिता जी मेरे लिए एक
रंगीन छतरी लाए थे।
हम छोटे थे इसलिए
छतरी भी छोटी थी।
कई रंग थे छतरी में।
रंग बिरंगी छतरी।
समय गुजरता गया
हम भी बड़े होते गए।
वो रंगीन छतरी अब
छोटी लगने लगी थी।
बारिश से बचने के लिए
दूसरे विकल्प आ गए थे।
वो छोटी रंगीन छतरी
काफी समय तक थी
पुरानी हुई तो फट गई
और फिर नष्ट हो गई।
अब पिता जी नही हैं
वो छतरी भी नही है।
पर अब सोचता हूं कि
छतरी छोटी नही थी
उस समय भी बड़ी थी
आज भी होती तो
वो बड़ी ही होती।
बहुत बड़ी होती।