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Saturday, February 24, 2024

काश मिल जाए। 19

सवाल जैसा हो वैसा जवाब मिल जाए।

मैं जैसा सोच लूं वैसा ही ख्वाब मिल जाए।

दिलों के खेल में बिल्कुल ये जरूरी तो नहीं

गुलाब देने के बदले गुलाब मिल जाए।


 ये तो चाहत नही कि आफताब मिल जाए।

दिलों के बीच का कुछ तो हिसाब मिल जाए।

मैं सारे हर्फ अपने होठों पर सजा लूंगा

तुम्हारे नाम की लिखी किताब मिल जाए।


        ( 2 ) 

जो कहे गए वो कतरा

जो कहना है वो समंदर।

समंदर में उछलती लहरें

लहरों में उभरती यादें

यादों में सिमटते तुम।

और तुझमें बिखरते हम।

खामोशियां 18

            ( 1 )

जो कही गईं 

वो थी कुछ बातें।

जो लिखे गए  

वो थे कुछ शब्द।

एक खालीपन लिए 

सब कुछ अपूर्ण।

उस खालीपन को 

उस अपूर्णता को

पूर्ण कर रही हैं। 

खालीपन भर रही हैं 

शब्द रहित 

स्वर रहित  

खामोशियां 

              ( 2 )


खामोशियां ही 

शब्दों को जन्म देती हैं।

खामोशियां ही 

शब्दों को मारती हैं।

शब्दों का जन्म-स्थल 

शब्दों का मृत्यु-स्थल

दोनो ही हैं

खामोशियां।

बात तो ये है 17

 बात तो ये है कि बात कुछ भी नही है।

जिंदगी से सवालात कुछ भी नही है।

आंखों से गिरते हुए अश्कों के सामने

बादलों की ये बरसात कुछ भीं नही है।


ऐसा नहीं कि जज़्बात कुछ भी नही है।

दिल पे लगता आघात कुछ भी नही है।

उन खुशियों से फैले उजालों के सामने

ये गम की अंधेरी रात कुछ भी नही है।


यादों के लिए दिन व रात कुछ भी नही है।

ऐसा नहीं कि अब हयात कुछ भी नही है।

दिल में इस तरह से एक बिसात बिछी है

जैसे कि अब शह व मात कुछ भी नहीं है।