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Saturday, February 24, 2024

बात तो ये है 17

 बात तो ये है कि बात कुछ भी नही है।

जिंदगी से सवालात कुछ भी नही है।

आंखों से गिरते हुए अश्कों के सामने

बादलों की ये बरसात कुछ भीं नही है।


ऐसा नहीं कि जज़्बात कुछ भी नही है।

दिल पे लगता आघात कुछ भी नही है।

उन खुशियों से फैले उजालों के सामने

ये गम की अंधेरी रात कुछ भी नही है।


यादों के लिए दिन व रात कुछ भी नही है।

ऐसा नहीं कि अब हयात कुछ भी नही है।

दिल में इस तरह से एक बिसात बिछी है

जैसे कि अब शह व मात कुछ भी नहीं है।

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