बात तो ये है कि बात कुछ भी नही है।
जिंदगी से सवालात कुछ भी नही है।
आंखों से गिरते हुए अश्कों के सामने
बादलों की ये बरसात कुछ भीं नही है।
ऐसा नहीं कि जज़्बात कुछ भी नही है।
दिल पे लगता आघात कुछ भी नही है।
उन खुशियों से फैले उजालों के सामने
ये गम की अंधेरी रात कुछ भी नही है।
यादों के लिए दिन व रात कुछ भी नही है।
ऐसा नहीं कि अब हयात कुछ भी नही है।
दिल में इस तरह से एक बिसात बिछी है
जैसे कि अब शह व मात कुछ भी नहीं है।
No comments:
Post a Comment