इस दुनिया में हर कोई मेहमान है क्या!
इंसान भी इत्तफाक से इंसान है क्या!
इंसान अगर हैं तो समझना है जरूरी
इंसानियत में कोई नुकसान है क्या!
क्यूं सामने उसके सर को है झुकाना
इंसान ही तो है कोई भगवान है क्या!
करती है बसर रूह हर शख्स की जहां
ये जिस्म भी जैसे कोई मकान है क्या
तारीफ उसकी करने से ईनाम मिलेंगे
हाकिम से ऐसा कोई ऐलान है क्या!
मालूम है दुश्मन को हर बात ही मेरी
मेरे दोस्तों में उसकी पहचान है क्या!
दिखता है ये आसमां बस एक रंग में
इसके ऊपर कोई और आसमान है क्या!
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