इसी बहाने अपने आस-पास होना।
जरूरी है कभी कभी उदास होना।
ज़मीन का होकर ज़मीन पर रहिए
मुमकिन तो नहीं है आकाश होना।
मुश्किलें गर राह में आ जाएं भी तो
वाजिब नहीं है बेवजह हताश होना।
डोर भरोसे की गर कमजोर हो गई
यकीनी है रिश्तों में फिर खटास होना।
आज की दुनिया में तो ये आम बात है
झूठ के ऊपर सच का लिबास होना।
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