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Thursday, April 22, 2021

दूरियां क्यों ?

                    


इश्क कुछ यूँ जता रहे हो तुम।

दूर हम से ही जा रहे हो तुम।


कोई शिकवा नही अगर मुझसे

बेरुखी क्यों दिखा रहे हो तुम।


हमसफर तुम थे हमनवा भी थे

आज दामन छुड़ा रहे हो तुम।


आंखों आंखों मे बात होती थी

आज आंखें चुरा रहे हो तुम।


दूर जाने की जिद तुम्हारी है

अश्क फिर क्यूं बहा रहे हो तुम।

Sunday, April 18, 2021

पारिवारिक दोहे ( पत्नी - महिमा )

                       


पत्नी सेवा धर्म है सुन लो सब इन्सान।

यदि पत्नी प्रसन्न है घर है स्वर्ग समान।


किचन काम आता जिन्हे वो हैं पति महान।

पत्नी के संग हाथ बटाएं दुनिया करे बखान।


बड़े से बड़े  सूरमा पत्नी से सकें ना जीत।

घर के बाहर  शेर हैं घर मे हैं भयभीत।


चाहे जो भी राज हो पत्नी लेगी जान।

जासूसी ऐसी करे नतमस्तक भगवान।


दशा दुर्दशा ना बने ये है अपने हाथ ।

जीवन भर देते रहें एक दूजे का साथ ।


एक बात बस और है सुन लो कान लगाय ।

घर की बात घर मे रहे बाहर कभी ना जाय।