इश्क कुछ यूँ जता रहे हो तुम।
दूर हम से ही जा रहे हो तुम।
कोई शिकवा नही अगर मुझसे
बेरुखी क्यों दिखा रहे हो तुम।
हमसफर तुम थे हमनवा भी थे
आज दामन छुड़ा रहे हो तुम।
आंखों आंखों मे बात होती थी
आज आंखें चुरा रहे हो तुम।
दूर जाने की जिद तुम्हारी है
अश्क फिर क्यूं बहा रहे हो तुम।

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