सब जान के भी तुम भी अंजान बने हो।
सुनते है की पत्थर के भगवान बने हो।
हर वक्त बेरुखी भी अच्छी नही होती
तुम ही तो मेरा दिल व मेरी जान बने हो।
अब छोड़ मेरे दिल को जाना न तुम कभी
मुद्दत से मेरे दिल के तुम मेहमान बने हो ।
अब लोग जानते हैं तेरे नाम से मुझे
महफिल मे तुम ही मेरी पहचान बने हो।
जज्बात मोहब्बत का समझी ना कभी है
रुख देख जमाने का क्यूं हैरान बने हो।

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