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Friday, October 15, 2021

किसको राम कहें।

                  


कृत्रिम रावण जल जायेगा।

पर फिर जिन्दा हो जायेगा।

अगले वर्ष जलने के लिये 

फिर अपना रूप दिखायेगा।

युगों युगों तक यही  क्रिया

ऐसे ही दोहरायी जायेगी।

पर दुनिया जीवित रावण 

किंचित भी मार ना पायेगी।

जब इसका कोई अन्त नही

कैसे अन्तिम संग्राम कहें।

रावण तो हैं अनगिनत यहां

पर किसको राम कहें।

पर किसको राम कहें।

Thursday, October 14, 2021

एक पुष्प तुम्हारे नाम करूं।

 


तुम आओ तुम्हारा अभिनन्दन

तुम्हे एक समर्पित शाम करूं।

पुष्पों से भरे गुल्दस्ते से 

एक पुष्प तुम्हारे नाम करूं।


हृदय के किसी अन्त: तल पर

यादों का एक पुलिंदा है।

कुछ तो उसमे मृतप्राय पड़े 

पर कुछ तो अभी तक जिन्दा है।

निर्जीव पड़े  स्मृतियों  मे 

तुम आओ तो उनमे प्राण भरूं।

पुष्पों से भरे गुल्दस्ते से 

एक पुष्प तुम्हारे नाम करूं।


यादों का एक स्वभाव यही 

बस अनायास आते रहना।

कोई चाहे या फिर ना चाहे

स्मृतियों मे छाते रहना।

आते जाते स्मृतियों का 

तुम आओ तो अल्प-विराम करूं।

पुष्पों से भरे गुलदस्ते से

एक पुष्प तुम्हारे नाम करूं।

Sunday, October 10, 2021

नाम-बेनाम

                    


दौर-ए-जमाँ  मे ये भी मुकाम शामिल है।

इंसानियत की कत्ल मे इन्सान शामिल है।


किसको सजा मिलेगी गुनाहगार कौन है

फैसले मे मुंसिफ का भी ईमान शामिल है।


फ़ेहरिस्त झूठों की अखबारों मे नही छपती

सबको पता है उसमे तुम्हारा नाम शामिल है।


सोचो की तुम पर इतने इल्जाम क्यों लगे

इसमे तुम्हारा खुद का भी बयान शामिल है। 


महफिल मे एक शख्स पर सबकी निगाह है

नामवरों मे शायद कोई बेनाम शामिल है।