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Monday, October 2, 2023

समांतर रेखाएं 9

 खामोशियां, उदासियां 

तुम और तुम्हारी यादें 

भावनाएं, संवेदनाएं

मेरे गीत मेरी कविताएं 

ये सब हैं मेरे जीवन की

समानांतर रेखाएं।

प्रारंभ से अनंत तक

चलती हैं साथ साथ। 

जाता हूं जिधर भी मैं

रहती हैं साथ साथ।

ऐसा नहीं कि इन सबसे

बिल्कुल अनदेखा हूं मैं 

इन्ही के साथ चलती 

एक समानांतर रेखा हूं मैं।

मैं प्रसंग हूं। 8

 किसी ने पूछा 

शब्द लिखते हो ,

अर्थ लिखते हो, 

लेकिन इनमें 

तुम क्या हो ?

तुम कहां हो ?

मैने कहा उनसे

शब्द केवल 

शब्द नहीं हैं।

अर्थ केवल 

अर्थ नही हैं।

अनुभूतियों की,

भावनाओं की,

संवेदनाओं की,

सम्पूर्ण आख्या हैं

विस्तृत व्याख्या हैं।

मैं उस व्याख्या का 

एक अभिन्न अंग हूं 

मैं ही प्रसंग हूं।