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Monday, September 13, 2021

दृश्य और परिदृश्य


जो दिखता है

या दिखाया जाता है 

आवश्यक नही ;

वो सत्य और उचित हो

या सामयिक भी हो।

जो हम देखते हैं ;

वो तो महज दृश्य है। 

क्या है दृश्य के पार ?

क्या होगा दृश्य के बाद?

क्या पता , किसे पता ?

इसलिये आवश्यक है ;

दृश्य देखते समय

बीच मे कभी कभी 

गर्दन घुमाते रहना

अनुभव करते रहना

अपने आस -पास का 

और चारों  तरफ का 

और  देखते रहना

केवल दृश्य नही

परिदृश्य भी।