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Saturday, July 25, 2020

बरसते नयन अम्बर के


मैं और तुम जब हुए हम,
बरसते नयन अम्बर के
गये हैं वो भी देखो थम ।

दिलों की दूरियां भी तो ,
कि लगता था बढ गयी हैं
जरा सा पास हम जो आये
हो गयी वो भी अब हैं कम।

अब जब तुम साथ हो मेरे ,
दिलों को कुछ तो राहत है
वो हमको  याद करते थे
हर लम्हा और हर दम ।

चलो अच्छा हुआ कि हम
वहीं पर फिर मिल गये हैं,
जहां पर थे हुए आरम्भ
हम दोनो के रंजो - गम।

अब आ भी जाओ !

           
मैं अपने दिल का तुम्हे एक एक एहसास देता हूं ,
कि अब आ भी जाओ मैं तुम्हे आवाज देता हूं।

तुम्हारे हाथ की नरमी अभी तक याद है मुझको,
बस उसकी याद मे मैं अपनी रातें काट देता हूं।

किस्मत का मेरे हर खेल अब तुम पर ही निर्भर है ,
खुद ही से जीतता हूं और खुद ही को मात देता हूं।

तुम्हारा नाम लिखकर सैकडों कागज के पन्नों पर,
फिर उन कागज के पन्नों को मैं अक्सर फाड़ देता हूं।

मेरे दिल से तुम्हारी याद बिल्कुल भी नही जाती,
उन्ही यादों को अपने दिन और अपनी रात देता हूं।

Sunday, July 19, 2020

बेरुखी आपकी


याद है फिर भी भूलने का बहाना क्यूँ है ,
ऐसा कह कह के मुझे यूँ ही सताना क्यूँ है।

बेरुखी अपनी कभी ऐसे ही जाहिर कर दो,
यूँ सरे आम जमाने को दिखाना क्यूँ है।

दिल की बातें हैं इन्हे दिल मे ही अब रहने दो,
औरों के सामने यूँ  होठों पे लाना क्यूँ है।

पास आये हो तो कुछ और देर  बैठो अभी,
इतनी जल्दी से हमे छोड़ के जाना क्यूँ है।

इतनी नफरत है तो बस इतना बता दो हमको,
हमे खोकर भी तुम्हे हमको ही पाना क्यूँ है।