याद है फिर भी भूलने का बहाना क्यूँ है ,
ऐसा कह कह के मुझे यूँ ही सताना क्यूँ है।
बेरुखी अपनी कभी ऐसे ही जाहिर कर दो,
यूँ सरे आम जमाने को दिखाना क्यूँ है।
दिल की बातें हैं इन्हे दिल मे ही अब रहने दो,
औरों के सामने यूँ होठों पे लाना क्यूँ है।
पास आये हो तो कुछ और देर बैठो अभी,
इतनी जल्दी से हमे छोड़ के जाना क्यूँ है।
इतनी नफरत है तो बस इतना बता दो हमको,
हमे खोकर भी तुम्हे हमको ही पाना क्यूँ है।

No comments:
Post a Comment