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Saturday, July 25, 2020

बरसते नयन अम्बर के


मैं और तुम जब हुए हम,
बरसते नयन अम्बर के
गये हैं वो भी देखो थम ।

दिलों की दूरियां भी तो ,
कि लगता था बढ गयी हैं
जरा सा पास हम जो आये
हो गयी वो भी अब हैं कम।

अब जब तुम साथ हो मेरे ,
दिलों को कुछ तो राहत है
वो हमको  याद करते थे
हर लम्हा और हर दम ।

चलो अच्छा हुआ कि हम
वहीं पर फिर मिल गये हैं,
जहां पर थे हुए आरम्भ
हम दोनो के रंजो - गम।

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