हे मां वीणा वादिनी , तुम कष्ट हरो माता।
ज्ञान बुद्धि विद्या से , तुम हमको भरो माता।
वैसे तो निस दिन ही , हम ध्यान तुम्हे धरते,
ऋतु बसंत दिन पंचमी , विधि से पूजा हम करते,
श्वेत कमल पर आसन हो , तुम कृपा करो माता।
ज्ञान बुद्धि विद्या से , तुम हमको भरो माता।
ब्रम्हा विष्णु और महेश , सब तुम्हे पूजते हैं,
ज्ञान कला विद्या की , देवी तुम्हे मानते है,
श्वेत वस्त्र व तुषार हार है तुमको बहुत भाता।
ज्ञान बुद्धि विद्या से , तुम हमको भरो माता।
राजहंस पर हो सवार वीणा-पुस्तक हो हाथ मे,
कर के मध्य निवास तुम्हारा दया तुम्हारी साथ मे,
निस दिन कर वन्दना तुम्हारी उच्च प्रगति पाता।
ज्ञान बुद्धि विद्या से , तुम हमको भरो माता।
