इक बार तुम्हे कोई सुन ले
फिर तुमको वो कैसे भूले
सब सात सुरों से सजी हुई
एक स्वर लहरी जैसी हो तुम।
इक बार तुम्हे कोई पढ़ ले
फिर तुमको वो हर पल ढूढे
कल्पना लोक मे सजी हुई
एक परी कथा जैसी हो तुम।
इक बार तुम्हे कोई देखे
हर कली लगे मुरझाई सी
फूलों के गुलशन मे जैसे
पुष्प एक खिली हो तुम।
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