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Monday, June 6, 2022

तुम

 इक बार तुम्हे कोई सुन ले 

फिर तुमको वो कैसे भूले

सब सात सुरों से सजी हुई

एक स्वर लहरी जैसी हो तुम।

इक बार तुम्हे कोई पढ़ ले

फिर तुमको वो हर पल ढूढे

कल्पना लोक मे सजी हुई

एक परी कथा जैसी हो तुम।

इक बार तुम्हे कोई देखे

हर कली लगे मुरझाई सी

फूलों के गुलशन मे जैसे 

पुष्प एक खिली हो तुम।

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