कमरे मे दो आंखें
जब देखता हूं उन्हे ,
वो भी देखती हैं मुझे।
जिस तरफ भी घूमूं मैं
वो भी घूम जाती हैं ,
बस उस तरफ ही।
मैं उन्हे देखूं तो
वो भी मुझे देखती हैं।
कोई और उन्हे देखे
तो वो उन्हे देखती हैं।
जो भी देखे उन्हे
बस उन्हे देखती हैं।
कुछ बोलती नही ,
कुछ कहती नही ,
एक टक निहारती
भ्रमित करती ,
दीवाल पर टंगी
दो स्थिर आंखें।
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