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Saturday, April 15, 2023

अदृश्य भावनाएं

 कभी कभी

दो चार शब्द भी 

सिर्फ शब्द नही होते।

उनमें छिपी होती है

संवेदनाओं से सजी, 

भावनाओं से परिपूर्ण,

एक संपूर्ण किताब।

शब्दों को पढ़ने से 

समझ में आते हैं

सिर्फ उनके अर्थ।

शब्दों और अर्थों के 

अप्रत्याशित द्वंद में,

अछूती रह जाती हैं

शब्दों में समाहित 

असीमित और 

अपरिभाषित

निर्दोष भावनाएं।

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