छोटू बाबू हुए बड़े।
चल लेते हैं खड़े खड़े।
पहिए वाले घोड़े पर
घूम रहे हैं चढ़े चढ़े।
दिन भर करते शैतानी
कुच्छू नाही पढ़े पढ़े।
चाहे वो कुछ भी बोलें
रहते उस पर अड़े अड़े।
छोटी छोटी बातों पर
रहते सबसे लड़े लड़े।
मम्मी ने डांटा उनको
आज सबेरे कड़े कड़े।
देख के मम्मी का गुस्सा
सिसक रहे हैं पड़े पड़े।
मम्मी अब पुचकार रहीं
देख के आंसू घड़े घड़े।
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