सागर की गहराई में तुम
पर्वत की ऊंचाई में तुम।
प्रश्नों और जवाबों में तुम
आते जाते ख्वाबों में तुम।
पुष्पों और लताओं में तुम
मेरी हर कविताओं में तुम।
सांसों में तुम यादों में तुम
सुबह शाम फरियादों में तुम।
झिलमिलाती लड़ियों में तुम
फूलों की पंखुड़ियों में तुम।
अंधेरों और उजालों में तुम
ख्वाबों और ख्यालों में तुम।
मेरे दिल की बातों में तुम
और चांदनी रातों में तुम।
हर बंधन हर फेरों में तुम
मेरी गजल के शेरों में तुम।
हर रास्ते हर राहों में तुम।
मंजिल और पनाहों में तुम।
आशा और निराशा में तुम
रिश्तों की परिभाषा में तुम।
प्रश्न है किन रिश्तों में तुम
दुनिया के हर रिश्तों में तुम।
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